अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंइसके बाद वे मिनहाट में रहने लगे। खेती के साथ-साथ वे साहित्य की
रचना भी करते थे। इसी बीच बिस्मिल ने बंगला भाषा भी सीखी जो
बहुत काम आयी। उन्होंने पुस्तकों का अनुवाद भी किया (निहिलिस्ट
रहस्य, बोल शेविकों की करतूत) जो काकोरी केस में उनके विरुद्ध
दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत किया गया। शाहजहाँपुर के बिस्मिल के बाद
सबसे सक्रिय व्यक्ति देव नारायण थे जिनका उपनाम भारतीय था, छक्कन
लाल के नाम से भी जाने जाते थे। गेंदालाल के बाद मातृवेदी के नेतृत्व
की दावेदारी भी उन्होंने प्रस्तुत कर दी। देव नारायण आगरा के निवासी
थे। देवनारायण की प्रशंसा में शचीन्द्र नाथ सन्याल ने लिखा है-‘देव
नारायण बहुत गम्भीर प्रकृति के समझदार आदमी थे। लेकिन हमारे देश
का परम दुर्भाग्य है कि गम्भीर प्रकृति के समझदार व्यक्तियों ने निहायत
ही कम संख्या में भारतीय विद्रोह आन्दोलन में भाग लिया है।.... उनसे
बात-चीत करके यह तय हुआ था कि देव नारायण अपने गाँव को छोड़कर
आगरा में जाकर अपना केन्द्र स्थापित करेंगे। यदि देव नारायण ऐसा
करते तो उत्तर भारत का विप्लव आन्दोलन और भी गौरवमय रूप धारण
करता।¹
रंगीसिंह के पुत्र गंगा सिंह चन्देल जो नयागंज, थाना-परौर,
जलालाबाद के निवासी थे, मैनपुरी काण्ड में फरार रहे। गंगा सिंह का
छद्म नाम ‘रामनाथ चिरईया' था। 1 सितम्बर 1918 में मोहल्ला रंग
महला (शाहजहाँपुर) शक्ति सिंह के मकान के कमरे में विस्फोटक
पदार्थयुक्त बोतल गंगा सिंह के हाथ से फट गयी। पुलिस का आरोप था
कि 25 जून 1918 को मिशन हाई स्कूल, मैनपुरी की विज्ञान प्रयोगशाला
से तेजाब व पारा की जो बोतलें चुराई गई थी,
- स्वतंत्रता आन्दोलन में शाहजहाँपुर का योगदान, डा०एन०सी० मेहरोत्रा, पृष्ठ-93
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