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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

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उसका प्रयोग गंगासिंह विस्फोटक सामग्री बनाने में करते थे।¹ शाहजहाँपुर
के राजाराम की चर्चा की जा चुकी है, जो अशफाक के प्रेरणादायक बने
थे। अशफाक ने राजाराम के विषय में लिखा भी है। यहाँ थोड़ी और
चर्चा आवश्यक जान पड़ती है। राजाराम की पुष्टि शक्ति प्रसाद (मकान
मालिक) और उनके नौकर वजीर खाँ ने की। मिशन स्कूल के हेड
मास्टर रूफस चरन के सामने राजाराम की तलाशी ली गई। पुलिस के
अनुसार निम्नलिखित आपत्तिजनक सामग्री मिली।
(क) बास्टक से एक डायरी जिसमें 17 मार्च 1917 से 18 अक्टूबर 1918 तक
की कई प्रविष्टियाँ अंग्रेजी में राजाराम की हस्तलिपि में मिली थीं।
(ख) टोपी से एक कागज
(ग) एक कागज जो उन्होंने फाड़कर फेक दिया तथा पुलिस ने उसे जोड़ा।
इसके अतिरिक्त राजाराम के कमरे से दो नकली मूँछे मिली। इसी प्रकार
की मूंछे जून 1918 में बरेली में डाली गयी डकैती के स्थान से मिली थी।
उनके कमरे में शस्त्रों के अवशेष पाये गये तथा स्वदेशी शपथ की 242
छपी प्रतियाँ मिली।²
मुखबिर सोमदेव के अनुसार राजाराम भारतीय संडा खेड़ा व परेली
की डकैती में शामिल थे। उन्होंने स्वाधीनता की प्रतियाँ शाहजहाँपुर व
दिल्ली में बेची। राजाराम बाजपेई का छद्म नाम गौतम था जबकि
राजाराम का कथन था कि वह आर्य कुमार सभा तथा सेवा समिति का
स्वयं सेवक था तथा उसकी शाखा उसने अपने ग्राम में स्थापित की।
सोमदेव के अनुसार राजाराम एक गुप्त संगठन 'मातृवेदी' के सदस्य थे।
डायरी में 'हरि' 'गणेश' व 'लक्ष्मण' नाम की चर्चा थी।

  1. स्वतंत्रता आन्दोलन में शाहजहाँपुर का योगदान, डा०एन०सी० मेहरोत्रा, पृष्ठ-90
  2. स्वतंत्रता आन्दोलन में शाहजहाँपुर का योगदान, डा०एन०सी० मेहरोत्रा, पृष्ठ-91
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