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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

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गेंदा लाल जी ने 1916 में मैनपुरी में 'मातृवेदी' नामक क्रांतिकारी संस्था
बनाई।¹ यह संस्था गुप्त रूप से बनायी गयी थी। इस संस्था का उद्देश्य
ही था कि देश को अंग्रेजी दासता से मुक्त कराना। थोड़े ही समय के
बाद इस संस्था की गतिविधियाँ लखनऊ, शाहजहाँपुर, आगरा, मथुरा,
इटावा, फरूर्खाबाद, कानपुर, फतेहपुर और मुरादाबाद में भी फैल गयीं।
मैनपुरी जनपद का नेतृत्व शिव कृष्ण ने किया और शाहजहाँपुर में राम
प्रसाद बिस्मिल, लखनऊ में गंगा सिंह ने नेतृत्व का भार सम्भाला।
गेंदालाल जी पूरे उ०प्र० का नेतृत्व कर रहे थे।² यह संयोग ही था कि
गेंदा लाल ने डाकुओं के सरदार पंचम सिंह को अपनी तरफ मिला लिया।
पंचम सिंह के सम्मिलित होने के कारण पाँच सौ घुड़सवार और दो सौ
पैदल एवं लाखों की सम्पत्ति क्रांतिकारियों के काम आयी। यह भी
उल्लेखनीय है कि - संस्था में श्री कृष्ण पालीवाल, श्री चन्द्रधर जौहरी
आदि अनेक नामी गिरामी क्रांतिकारियों ने कार्य किया। मातृवेदी संस्था
की गतिविधियों की प्रमुख चार शाखाएं थीं, जो निम्नवत् हैं -

  1. विदेशी सरकार के खिलाफ पुस्तकों, कविताओं और इस्तहार का
    प्रयोग।
  2. सैनिक विभाग का कार्य धन इकट्ठा करने के लिए डकैती डालने
    हेतु अस्त्र शस्त्रों का संग्रह करना था। साथ ही इसका कार्य सैनिक
    तैयार करना था।
  3. ब्रिटिश और देशी राज्यों की विभिन्न सैनिक छावनियों के सदस्यों
    की जानकारी एकत्र करने और सरकारी खजाने के धन और अस्त्र
    शस्त्र के विषय में जानकारी प्राप्त करने के लिए 'गुप्ताचार्य' या
    जासूसी विभाग था। इस विभाग का कार्य डकैती डालने वाले
    स्थानों की सूचना भी एकत्र करना था।
  4. मैनपुरी जनपद का राजनैतिक इतिहास, चिन्तामणिशुक्ल, पृष्ठ-61
  5. मैनपुरी जनपद का राजनैतिक इतिहास, चिन्तामणिशुक्ल, पृष्ठ-62
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