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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 65, कुल 297 में से

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मैनपुरी काण्ड का प्रभाव अशफाक उल्ला पर इतना पड़ा कि वे देश
के क्रांतिकारी बनने के अतिरिक्त कुछ सोच ही नहीं सकते। निश्चित ही
वे मैनपुरी काण्ड की घटना से खासे प्रभावित थे और यह भी तय था कि
मैनपुरी काण्ड की घटना की एक-एक जानकारी हासिल करने का अशफाक
ने प्रयास किया होगा। संयुक्त प्रान्त
(उत्तर प्रदेश) में बनारस षड़यन्त्र (1915-16) के बाद दूसरे प्रमुख
षड्यंत्र की सफल रचना मैनपुरी में हुई। जिसका प्रभाव अशफाक पर पड़ा
था। शाहजहाँपुर के अनेक क्रांतिकारी इस घटना में सम्मिलित थे।
अशफाक की मानसिक संरचना उन्हें क्रांतिकारी कृतित्व की ओर खींचती
है।
मैनपुरी काण्ड के प्रमुख नेता गेंदा लाल दीक्षित थे। गेंदा लाल का
आगरा जिले के बाह तहसील में 20 नवम्बर 1888 को जन्म हुआ।
धनाभाव गेंदा लाल को भी हाई स्कूल से आगे शिक्षा पाने में रुकावट
बना। राम प्रसाद बिस्मिल की तरह ही गेंदा लाल भी आर्य समाज से
खूब प्रभावित थे। आजादी की लड़ाई में गेंदा लाल ने अथक प्रयास
किया। यह भी कहा जाता है कि आजादी हेतु क्रांति का प्रथम पाठ राम
प्रसाद बिस्मिल ने भी पढ़ा उन्हीं से था। दीक्षित जी एक बार हुए शिवाजी
उत्सव से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने शिवाजी नाम से एक संस्था ही
बना डाली। वे लोकमान्य तिलक के भक्त थे और राम प्रसाद बिस्मिल से
प्रभावित थे। यही राम प्रसाद बिस्मिल अशफाक के मित्र ही नहीं
प्रेरणास्तम्भ भी थे। 'शिवाजी समिति' के कई सदस्य बने। निः सन्देह
मैनपुरी काण्ड जिसके अगुआ गेंदालाल दीक्षित थे और जिसका प्रभाव
अशफाक पर सबसे ज्यादा पड़ा, वह काण्ड अंग्रेजी शासन के विरुद्ध
देशभक्त युवकों के आक्रोश का प्रतीक था।
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