अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअध्याय-तीन
मैनपुरी षड्यंत्र और अशफाक उल्ला खाँ
बचपन के सामाजिक वातावरण ने अशफाक उल्ला का मानसिक वातावरण
तो तैयार कर ही दिया था। पुस्तक पढ़ने के शौक के क्रम में अशफाक ने
अपने एक साथी से 'आनन्द मठ' नामक उपन्यास मंगा कर पढ़वाया
और एकाग्र होकर आनंदमठ की कथा सुनने लगे थे।¹ वे हिन्दी कम
जानते थे। इस साथी ने भी अशफाक के क्रांतिकारी बनने में विशेष
योगदान दिया। एक बार तो उनके मन में आया कि वे देश से बाहर
जाकर देश का कार्य करें। परन्तु इसी मित्र ने देश में रहकर देश सेवा हेतु
क्रांतिकारी दल में सम्मिलित होने की सलाह दी। अशफाक उल्ला को यह
सलाह अच्छी लगी और वे इस प्रयास में लग गये कि कब क्रांतिकारी दल
के सदस्यों से मुलाकात हो और वे दल में शामिल होकर अपनी प्रतिभा
दर्ज करा सकें।
अंग्रेजों के अत्याचार से और उनकी घोर दमन नीति के कारण देश में
भीषण असंतोष फैल गया था। भारतीय युवा विदेशी सत्ता के विरुद्ध
आक्रोशित हो उठे थे। युवाओं में अंग्रेजी शासन के पूर्णतया सफाया करने
का उमंग और जोश उमड़ रहा था। ऐसे में उ0प्र0 भी अपवाद भला कैसे
रहता। 1915-16 के वाराणसी षड्यंत्र काण्ड के रूप में अक्रोश फूट चुका
था। मैनपुरी में अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध एक गुप्त संस्था की स्थापना हो
चुकी थी। मैनपुरी प्रमुख केन्द्र था।² वैसे तो उत्तर प्रदेश के क्रांतिकारी
आन्दोलन का नेतृत्व बनारस के निवासी बंगाली क्रांतिकारियों ने किया
लेकिन मैनपुरी काण्ड की प्रमुख विशेषता थी कि इसे उ0प्र0 के निवासियों
ने किया। इस काण्ड पर बंगाली क्रांतिकारियों का प्रभाव नहीं था।³
- शहीद अशफाक उल्ला, सुधीर विद्यार्थी, पृष्ठ 10
- मैनपुरी जनपद का राजनैतिक इतिहास, चिन्तामणिशुक्ल, पृष्ठ-61
- भारतीय क्रांतिकारी आन्दोलन का इतिहास, मन्यथनाथ गुप्त पृष्ठ 94
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