अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंजिनका विवाह पढ़े लिखे खासे सम्मानित परिवार में हुआ था।
बहन परवरिश बानो का विवाह सहारनपुर के प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट
मुहम्मद अब्दुल कादिर के साथ हुआ था। अशफाक स्वयं को न तो
परिवार में उलझाये न ही कोई पारिवारिक मोह पाला। उन्होंने मातृ भूमि
की स्वाधीनता को ही सर्वोपरि दायित्वों में रखा।
<u>वातावरण का प्रारम्भिक प्रभाव एवं अशफाक की शिक्षा</u>
किसी भी व्यक्ति के लिए उसका परिवेश, उसका वातावरण और
शुरुआती शिक्षा का विशेष प्रभाव पड़ता है। अशफाक तो अपने पूर्वजों की
शिक्षा के प्रति उदासीनता के कारण दुखी तो थे ही लेकिन माँ से खासे
प्रभावित रहे। और कोई भी कारण हो प्रभावित होने का लेकिन अध्ययन
के प्रति माँ की रुचि अशफाक को माँ की मानसिकता की ओर खींचती
अवश्य है। अशफाक के पिता पुलिस में रहे, सो पर्याप्त धन कमाया।
दोनों बड़े पुत्रों (शफीउल्ला खाँ और मुहम्मद रिसायत उल्ला खाँ) पर
उन्होंने शिक्षा हेतु खूब खर्च किया। लेकिन शिक्षा के लिए धन की उतनी
आवश्यकता नहीं होती जितना मन की होती है। रियासत उल्ला खाँ
किसी प्रकार उर्दू की मिडिल परीक्षा पासकर सके थे। उन्होंने कक्षा सात
तक अंग्रेजी पढ़ने के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। अशफाक ने अफसोस जाहिर
किया है कि वे दोनों ऐसे ही थे जैसे कदनखेल खानदान के अन्य
मेम्बर।¹ पिता क्या करते, खानदान के अन्य लोग अंग्रेजी पुस्तक को हाथ
लगाना भी पाप समझते थे। एक घटना ऐसी ही घट भी चुकी थी कि एक
बार अंशफाक के एक मित्र अपनी अंग्रेजी की पुस्तक एक बार किसी
रिश्तेदार के घर भूल आये। जब उस घर के लोगों ने किताब पड़ी देखी,
तो किसी को भी छूने का साहस न हुआ,
- अशफाक उल्ला खाँ, भवान सिंह राणा पृष्ठ-18
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