अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
पृष्ठ 53, कुल 297 में से
संदर्भ में पढ़ेंअशफाक उल्ला खाँ का घरेलू नाम अच्छू खान था। कौन जानता था कि
उनका अच्छू जो घर का सबसे दुलारा है, सबसे छोटा है, वह आगे
चलकर मातृभूमि के लिए प्राणों का बलिदान करेगा और इतिहास में अमर
हो जायेगा। अशफाक के बलिदानी कृतित्व से परिवार शहर और प्रदेश ही
नहीं, देश का भी गौरव बढ़ा है। निश्चित ही अशफाक के बिना उ०प्र० के
क्रांतिकारी इतिहास का पृष्ठ पूरा नहीं होता।
बालक अशफाक को माँ से विशेष लगाव था। माँ उलनिसाँ भी
अशफाक का खूब ख्याल करती थी। बचपन के दिनों में अशफाक अपने
साथी बच्चों से झगड़ा करते या उन्हें पीट देते थे तो उलनिसाँ बेगम बच्चों
को पैसे देती, दुलारती और प्रसन्न कर देती। अशफाक पर माँ का स्नेह
बराबर बना रहा यहाँ तक कि क्रांतिकारी दिनों में जब अशफाक घर से
कई-कई दिन गायब रहने लगे तो बड़े भाइयों को चिन्ता होने लगी थी
लेकिन माँ गुस्सा हो जाती और डाँटकर कहती कि - 'अगर तुमने
अशफाक के विषय में कुछ भी कहा, तो मैं यह घर छोड़ दूँगी। तुम्हें उसे
नसीहत देने की आवश्यकता नहीं है'। अशफाक को इतना प्रेम परिवार से
मिला कि अपने पिता के न रहने की कमी कभी न खली।
अशफाक कुल मिलाकर चार भाई और एक बहन थे। सबसे बड़े
भाई का नाम मुहम्मद शफी उल्ला खाँ था जिन्हें लोग आदर और सम्मान
देते थे। शफी उल्ला धार्मिक प्रवृत्ति के इन्सान थे। दूसरे भाई रियासत
उल्ला खाँ ने लिखा है, 'बड़े भाई साहब अल्लाह-अल्लाह के सिवाय कोई
काम नही करते थे। वही दूसरे भाई रियासत उल्ला खाँ निष्ठा के साथ
घर की पैतृक भूमि की देखभाल करते थे। सारी खेती-बारी की जिम्मेदारी
इन्हीं पर थी। तीसरे भाई मुहम्मद शहनशाह खाँ भूपाल रियासत में
कलेक्टर आशरा के चीफ रीडर थे। निश्चित ही उन्हें रियासत और अंग्रेजों
के व्यवहार का ज्ञान रहा होगा। अशफाक की एक ही बहन थी।
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