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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 52, कुल 297 में से

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बेगम साहिबा समाचार पत्र पत्रिकाएं पढ़ने का शौक रखती थी।
परम्परानुसार पान खाने का भी विशेष शौक था।¹
अशफाक का घर आम आदमी से ऊपर एक रईस का घर माना
जाता था। माता-पिता के समय में उनके घर कई नौकरानियाँ रहती थीं।
घर अभाव से दूर था। पेंशन (पिता की पेंशन) और कृषि से आय खूब
होती थी। घर की पूर्णतः मालकिन अशफाक की माँ ही थीं। कमी तो
कोई थी नही, ऊपर से उलनिसाँ बेगम का हृदय दयालु भी था। वे
साधनहीन विधवाओं की सहायता करती रहती, उन्हें भोजन कराती रहती
थी। इसी कारण उनका सम्मान समाज में भी था। वह किसी को दुखी
देखना नही चाहती थी। गरीब लड़कियों के विवाह में वह यथासम्भव
सहायता करती रहती थी। परिवार नही समाज के लोग भी उनसे परामर्श
किया करते थे। अशफाक ने उल्लेख भी किया है - 'मोहल्ले के
मर्द-औरतें हर मामले में हमेशा उनकी सलाह के बगैर कोई शादी ब्याह
नहीं करते थे। गरज कि उनकी सलाह के बगैर खानदान में कोई काम
न होता था और सब लोग उनका बड़ा ख्याल करते थे। वह कद्दावर और
भरे जिस्म की बीबी थी। वह बहुत हँसमुख थी।²
जन्म और अशफाक का बचपन :-
स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का क्रांतिकारी पृष्ठ अशफाक उल्ला खाँ
के नाम से रोशन है। ऐसे वीर सपूत अशफाक उल्ला खाँ का जन्म 22
अक्टूबर 1900 को शाहजहाँपुर के एक मध्यम श्रेणी के मुस्लिम परिवार में
हुआ।³ अशफाक अपनी माता मजहर उलनिसाँ बेगम की पाँचवी संतान
थे। वे अपने भाई बहनों में सबसे छोटे थे।


  1. अशफाक उल्ला खाँ, भवान सिंह राणा, पृष्ठ 14
  2. अशफाक उल्ला खाँ, भवान सिंह राणा, पृष्ठ-15
  3. अशफाक उल्ला खाँ, सुधीर विधार्थी, पृष्ठ-8
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