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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 51, कुल 297 में से

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वे लज्जा और कलंक से दबे हुए हैं और इसे धो डालना चाहते हैं लेकिन
खास बात तो यह है कि उन्हें पीढ़ी की चिन्ता है यही चिन्ता देश के हर
नौजवान तक जाती है। हमें सिर्फ फख्र करके नहीं जीना है अपनी
गुणवत्ता साबित करना है। वास्तव में अशफाक अपने समाज के प्रति,
विकास के प्रति, मानसिकता के प्रति बेहद चिंतित दिखाई देते हैं। बचपन
की बेचैनी ने उनके मानसिक उपकरणों की संरचना की है, जिससे वे एक
स्वस्थ क्रांतिकारी की हैसियत से इतिहास में दर्ज है।
अशफाक उल्ला खाँ की माँ मजहर उलनिशाँ बेगम मुहम्मद अब्दुल
हसन खान की पुत्री थी। अब्दुल हसन खलील गरबी के निवासी थे। वे
कचहरी में पुलिस सब-इन्सपेक्टर थे। यही नहीं उनके पिता सब-जज रह
चुके थे। विद्रोहियों के विरुद्ध कार्य करने के कारण विद्रोहियों के हाथों
पिता-पुत्र दोनों मारे गये। अशफाक की माँ उलनिशाँ बेगम विनम्र स्वभाव
की अति-दूरदर्शी और बुद्धिमान महिला थी। वैसे भी उनकी शिक्षा दीक्षा
ठीक ढंग से हुई थी, इसी वजह वह एक गुणवान महिला की श्रेणी में
आती हैं। अशफाक और उनके सभी भाई-बहन माँ से डरते थे और उनकी
आज्ञा का पालन करते थे। निश्चित ही अशफाक की माँ ने ऐसे संस्कार
दिये होंगे। ठीक ही कहा गया है माता निर्माता भवति। माँ निर्माण करती
है, मनुष्य बनाती है और अशफाक की माँ ने एक माँ का फर्ज बखूबी
निभाया भी है। अशफाक की माँ एक अनुशासन प्रिय महिला थीं।
परिवार में उनका इतना मान-सम्मान था कि अशफाक के पिता भी उनकी
बात कभी टालते न थे। संतानों में सबसे छोटे होने के कारण अशफाक
सबके प्यारे थे। खास तौर से माँ का स्नेह विशेष रहता था। उलनिशाँ
बेगम को पढ़ने-लिखने में रुचि थी। अध्ययन के प्रति लगाव का आलम
यह था कि उनके बिस्तर पर किताबों का ढेर लगा रहता था।
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