अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमातृपक्ष का अध्ययन
अशफाक की माता का पक्ष समृद्ध था। उनकी माँ खलील जाति की थी
और उनका वंश ‘हाफिज खेल’ नाम से जाना जाता था। अशफाक के
पूर्वजों से हाफिज खेल घराने से वैवाहिक सम्बन्ध होते थे। अशफाक का
पितृ पक्ष भले ही आर्थिक स्थिति में कमजोर था लेकिन वह देश प्रेम की
सुगंध में जीता था वहीं मातृपक्ष के पूर्वजों में ऐसी बात नहीं थी। हाँ
उनकी माली हालत बहुत अच्छी थी। इस खानदान के लोग 1857 से ही
सरकारी पदों पर कार्य करते आ रहे थे। 1857 के विद्रोह के समय
अशफाक की माँ के दादा तथा उनके भाई जज और डिप्टी कलेक्टर थे।¹
यही नहीं उस समय इन लोगों ने विद्रोहियों का साथ न देकर सरकार के
लिए जासूसी भी की थी। यह ज्ञात होने के बाद अशफाक के दिल-दिमाग
पर गहरा असर पड़ा था। कहीं न कही यह दाग धोने की ग्रंथि भी बन
रही थी। अशफाक उल्ला खाँ लिखते है '.......मुझे यह लिखते हुए शर्म
नही आती, हाँ केस के कब्ल अगर मुझे जरूरत महसूस होती तो हर्गिज
नही लिखता, क्योंकि जहां तक मेरा ताल्लुक है, मैं इसे बायसेसदनंग
समझता हूँ कि मुल्क के लोगों को अहसासे आजादी पैदा हो और वह
अपना खून मिस्ल पानी के बहाएं, अपने बच्चों की कुर्बानी कुर्बानगाहे
वतन पर चढ़ाएं, अपनी दौलत, आबरन मकान, गरज कि हर
शय-हँसी-खुशी के साथ आजादी और मजहब के लिए निसार दें, फिर
उनके साथ फरेब करना, उनके खिलाफ साजिश करना, उनकी स्कीमों को
तहस-नहस करने की कोशिश करना और वतनी दुश्मनों को इमदाद
करना, अगर शर्म और हजार शर्म की बात नहीं तो क्या है? मुझे
जमानाए तालिबेइल्मी अपने चन्द दोस्तों से हमेशा जिल्लत उठानी पड़ी,
- अशफाक उल्ला ख़ाँ, भवान सिंह राणा, पृष्ठ-11
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