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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 45, कुल 297 में से

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अशफाक उल्ला खाँ के पाँव पालने में ही नजर आ गये थे। ठीक
ही कहा गया है 'आमुखापाति कल्याणं कार्यसिद्धिं हि शंसति' तथा
“Coming events cast their shadows before” 'होनहार बिरवान के, होत चीकने
पात।' कारण क्या है? स्पष्ट है कि पूर्वजों द्वारा दिया गया वातावरण
निष्ठा से भरा था। परिवार ही ऐसा था कि जो भी कार्य व्यक्ति करता था
वह उसे लगन और निष्ठा, ईमानदारी के साथ करता था। अशफाक के
पूर्वज पठान थे और मूलतः पश्चिमोत्तर सीमा प्रान्त के निवासी थे।
मुगल सम्राट शाहजहाँ के शासन काल में अशफाक के पूर्वज शाहजहाँपुर
में आकर बस गये। शाहजहाँपुर जो पूर्वज आये थे उनका नाम खान
नजर मुहम्मद खाँ था। मुहम्मद खाँ अकेले नहीं आये थे, उनके साथ
अनेक भाई बन्धु भी थे। उनका सम्बन्ध सीमा प्रान्त के प्रसिद्ध कबीले
'नवाह' से था। उस समय कई पठान कबीले सीमा प्रान्त से आकर
शाहजहाँपुर में बस गये थे। जिस स्थान से मुहम्मद खाँ आये थे उस
स्थान का नाम 'गुलबैले' था।¹ यह संयोग ही था कि ननिहाल पक्ष भी
अशफाक के पूर्वजों के कबीलों से ही सम्बद्ध था। अर्थ यह हुआ कि मातृ
पक्ष और पितृ पक्ष की परम्पराएं काफी मिलती जुलती थीं। सो अशफाक
का संस्कार क्रमबद्ध तरीके से समयानुसार होता गया। संस्कारों में भेद
नहीं था।
<u>पितृ पक्ष के पूर्वज और अशफाक उल्ला खाँ-</u>
ज्ञातव्य है कि जो पूर्वज शाहजहाँपुर में आये उनका नाम खान
नजर मुहम्मद खाँ था। भरे-पूरे परिवार के मुहम्मद खाँ अपने धर्म और
ईमानदारी के प्रति समर्पित व्यक्ति थे। वे एक कौम परस्त इन्सान थे।
बाद में चलकर अशफाक का वंश कदनखेल के नाम से प्रसिद्ध हुआ।


  1. अशफाक उल्ला खाँ, भवान सिंह राणा, पृष्ठ-9
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