सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 41, कुल 297 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 41

अशफाक उल्ला खाँ के युग का इतिहास देखे तो काफी हद तक
अनेक बातें स्पष्ट हो जायेंगी। यह भी स्पष्ट हो जायेगा कि क्रांतिकारी
वातावरण तैयार करने में भले ही राम प्रसाद बिस्मिल ने महत्वपूर्ण
भूमिका निभाई हो लेकिन कंधे से कंधा मिला कर चलने वाला यह
मुस्लिम युवक अपने प्राणों की बलि देने पर अंशमात्र भी नही हिचका।
अशफाक जब क्रांतिकारी दल में सम्मिलित हुए तो वे छात्र थे। वे छात्र
धर्म जानते हैं। युवा थे, युवा का अर्थ था ओजस्वी स्वर, गर्म खून, पैना
विचार और कुछ विशेष करने की ललक, निष्ठा और अशफाक इन सब में
खरे साबित होते हैं। यही उनके व्यक्तित्व की पहचान भी थी। युवा मन
को योग्य साथ मिल गया तो निखरते देर नही लगती। अशफाक बिना
समय गवाये दिन पर दिन ओजस्वी होते गये। क्रांतिकारी अशफाक
काकोरी युग की बलिदानी उपज थे। जो 1927 में हिन्दू मुस्लिम एकता
तथा स्वतंत्र भारत का सपना लेकर फाँसी के तख्ते पर झूल गये। आर्य
समाजी विचारों के राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला खाँ की
मित्रता और मातृभूमि की आजादी के लिए शहीद हो जाना साम्प्रदायिक
सद्भाव के लिए बहुत महत्वपूर्ण बात थी जो हमारे इतिहास की बहुत बड़ी
विरासत है।¹ काकोरी युग के क्रांतिकारियों में अशफाक उल्ला खाँ सबसे
अधिक प्रगतिशील विचारों के थे। उनका सबसे मजबूत चरित्र था। एक
तरफ वे प्रगतिशील शायर थे तो दूसरी तरफ एक कुशल पार्टी के कार्यकर्ता,
जहाँ वे मजबूती और दृढ़ता के साथ खड़े दिखते हैं। काकोरी की घटना
और अशफाक या अन्य क्रांतिकारियों का इतिहास में महत्व इसलिए भी
बढ़ जाता है कि वह समय 1921 के असहयोग आन्दोलन के बाद का
समय था।


  1. अशफाक उल्ला खाँ और उनका युग-सुधीर विघाथी, पृष्ठ-10
    19