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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 40, कुल 297 में से

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राम प्रसाद बिस्मिल से दोस्ती हुई और वे स्वयं को समर्पित कर बैठे।
इसके बावजूद रामप्रसाद बिस्मिल से अशफाक की इच्छा व्यक्त (क्रांतिकारी
कार्य) होती रही और मामला हमेशा टलता रहा।.... अन्त में जब
अशफाक की इच्छा की प्रबलता देखी तो पं० राम प्रसाद जी ने उन्हें अपने
दल में सम्मिलित कर ही लिया।
ज्ञातव्य है कि अशफाक उल्ला खाँ कवि हृदय थे, उनके भीतर
मनुष्यता, देश प्रेम, भाई चारा, गंगा-जमुनी संस्कृति की भावना कूट-कूट
कर भरी थी। वे संवेदनाओं की पराकाष्ठा से परिचित थे। संवेदित हृदय
अपनी रचनाओं में अपना चित्र उकेर ही देता है। अशफाक की रचनाओं
से पता चलता है कि वे काव्य तत्व के अच्छे जानकार थे। वे कविता की
आत्मा को समझते थे। उन्हें पता था कि शायरी में अपनी बात कैसे कही
जाती है। उन्हें यह भी पता था कि वे अपनी शायरी में किस वैचारिक
भूमिपर खड़े हैं। कहना न होगा वे एक ऐसी जिन्दगी चाहते थे जहाँ आम
आदमी खुली हवा में सांस ले सके। कैद मुक्त जीवन की अभिलाषा
रखने वाले अशफाक ने बेहतरीन रचनाएं की हैं जो हमारे इतिहास की
काव्यात्मक धरोहर हैं।
काकोरी काण्ड में गिरफ्तार अशफाक को अपने प्राणों की आहुति
फाँसी के रूप में देनी पड़ी। लेकिन इसका फल यह हुआ कि क्रांतिकारियों
द्वारा किया गया यह काण्ड पूरे भारत में सूचित ही नही चर्चित भी हुआ।
क्रांतिकारियों द्वारा सम्पादित काण्डों में यह बड़ा काण्ड था। जिसका प्रभाव
जनता पर ही नही अंग्रेजों पर भी पड़ा। अशफाक का व्यक्तित्व ही नहीं
कृतित्व भी सारे भारत में फैला। यह भी कहा गया कि अशफाक उल्ला
खाँ ऐसे पहले मुसलमान क्रांतिकारी थे जिन्हें षड़यंत्र के मामले में फाँसी
दी गयी। उनका प्रयत्न था कि उनकी तरह अन्य मुस्लिम युवा भी
क्रांतिकारी बने और मातृ भूमि की रक्षा करें। अशफाक तो हिन्दू मुस्लिम
एकता के कट्टर समर्थक तो थे ही अपनी ही तरह औरों में भी यही
भावना देखना चाहते थे।
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