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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

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जिस तिजोरी के धन को लूटने की योजना थी, वह तिजोरी किसी अन्य
साथी से नही अशफाक के हाथों से ही टूटी। अशफाक के मत को
मन्मथनाथ गुप्त ने भी उचित ठहराया है। श्री गुप्त ने लिखा भी है कि -
'अशफाक उल्ला खाँ का विरोध किसी डर या भय से प्रेरित होकर न था।
प्रत्युत वह बुद्धिमत्ता की आवाज थी। बाद के इतिहास ने सिद्ध कर दिया
कि अशफाक सही थे और बाकी क्रांतिकारी गलती पर थे।¹ काकोरी ट्रेन
डकैती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले फरार अशफाक को 8 दिसम्बर
1926 को दिल्ली में गिरफ्तार कर लिया गया। इसके पूर्व वे कई स्थानों
पर घूमते रहे और फिर क्या होना था शायद अज्ञात मन को सब ज्ञात हो
गया था।
काकोरी काण्ड आधुनिक इतिहास के क्रांतिकारी अध्याय में
अतिमहत्वपूर्ण पृष्ठ बन गया है जिसका शीर्षक बनकर चमक रहे है
अशफाक उल्ला खाँ। इस उल्लेखनीय काण्ड में पं० राम प्रसाद बिस्मिल,
अशफाक उल्ला खाँ, चन्द्रशेखर आजाद, राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी, मुकुन्दीलाल,
मन्मथनाथ गुप्त, बनवारी लाल, शचीन्द्र नाथ वक्शी, मुरारीलाल, कुन्दन
लाल के नाम महत्वपूर्ण हैं। कलम के धनी अशफाक उल्ला खाँ में भीम
जैसी ताकत भी होगी, यह जानकर तो आश्चर्य ही लगता है। कहाँ
कोमल कवि हृदय, कहां बज्र जैसी भुजाएं। अशफाक के विषय में अक्सर
कहा जाता है कि - 'अशफाक बड़े सुडौल और सुन्दर युवक थे। ऐसे सुन्दर
व्यक्ति कम ही देखने को मिलते हैं। वे तैरने, घोड़े की सवारी,
क्रिकेट-हाकी खेलने बंदूक चलाने का शौक रखते थे।² इससे यह भी स्पष्ट
होता है कि वे शाहजहाँपुर के रईसों में गिने जाते थे।

  1. जांबाज (पत्रिका) डा० डी०एन मेहरोत्रा, पृष्ठ-48
  2. भारतीय क्रांतिकारी आन्दोलन का इतिहास-मन्मथनाथगुप्त, पृष्ठ-200
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