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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 38, कुल 297 में से

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आगे चलकर अशफाक उल्ला खाँ सशस्त्र क्रांति के ध्वजवाहक बने।¹
उनकी बहादुरी, निडरता और अदम्य साहस से भला कौन क्रांतिकारी
अछूता था। देशभक्ति की प्रबल भावना तो थी ही, साथ ही उनमें
हिन्दू-मुस्लिम को साथ-साथ लेकर चलने का अभूतपूर्व कौशल था। यही
क्षमता, यही संवेदनशीलता अशफाक को समाज में लोकप्रिय बना सकी।
कवि हृदय भावुक और संवेदनशील तो होता ही है। वे अपनी बात
कविताओं, गज़लों एवं नज़्मों में कहते थे। उनकी लिखी गयी कविताएं
आज भी रेखांकित होती हैं।
अशफाक की कविताओं के बिना स्वतंत्रता संघर्ष हेतु लिखी गयी
रचनाओं का अध्याय पूरा नही होता। अशफाक के पत्र और उनके वक्तव्य
इतने प्रभावित करते हैं कि एक शान्त मन भी उद्वेलित हुए बिना नही रह
सकता। अशफाक के बचपन का अध्ययन करने से स्पष्ट है कि पूत के
पाव पालने में ही नजर आने लगे हैं। वे जब भी मेले जाते थे तो
तलवार खरीदते थे। जिससे पता चलता है कि अशफाक के भीतर क्या रहा
है। निश्चित ही यह गुण क्रांतिकारी होने का अंकुरण है।
मैनपुरीकाण्ड का प्रभाव तो अशफाक पर पड़ ही चुका था और वे
बाकायदा राम प्रसाद बिस्मिल की सेना में शामिल भी हो गये थे।
अशफाक अब क्रांतिकारी पहचान की संज्ञा से अलंकृत थे। छोटी-छोटी
घटनाओं डकैतियों के बाद जब राम प्रसाद बिस्मिल की घोषणा के
अनुसार वे काकोरी काण्ड में महत्वपूर्ण भागीदारी निभाने हेतु प्रथम पंक्ति
में खड़े हुए तो अशफाक की निष्ठा, उनका शौर्य, बल, साहस का आभास
किये बिना रहा नही जा सकता है। वैसे तो अशफाक इस डकैती की
योजना के पक्षधर नही थे। लेकिन स्वयं को मनाकर जब वे प्रस्तुत हुए
तो उनके फौलादी तेवर और ताकतों की सभी साथियों ने सराहना की।

  1. जांबाज (पत्रिका) सम्पादक, सुरेश चन्द्र मिश्र पृष्ठ-1
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