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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 37, कुल 297 में से

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पृष्ठ 37

अशफाक उल्ला खाँ भारत में हिन्दू मुस्लिम एकता का सपना लेकर
क्रांतिकारी बने थे। वे एक प्रगतिशील समाज की संरचना चाहते थे। यही
नही वे समाजवादी विचारधारा के पोषक थे। स्वयं अशफाक ने कहा है -
'मैं हिन्दुस्तान की ऐसी आजादी का ख्वाहिशमंद हूँ जिसमें गरीब खुश
और आराम से रहते और सब बराबर होते।' ऐसी विचारधारा के धनी
अशफाक निश्चित ही स्तुत्य हैं। अशफाक के काल में क्रांतिकारियों का
एक और प्रमुखकाम था कि वे अपने सभी मित्रों को, चाहे वे क्रांतिकारी
हों या न हों, मातृभूमि के लिए आत्म बलिदान हेतु प्रेरित करते रहते थे।
क्रांतिकारियों का कार्य महत्वपूर्ण तो था ही लेकिन इससे अधिक महत्व था
स्वतंत्रता के संघर्ष में स्वस्थ और सार्थक वातावरण तैयार करना और
वातावरण के काम में शायर दिल अशफाक उल्ला खाँ सबसे आगे थे। यह
उनके पत्रों विचारों और काव्य रचनाओं से स्पष्ट हो जाता है। अशफाक
बचपन में अपने मौलवी साहब की शिक्षाओं से खूब प्रभावित हुए।
मौलवी साहब सच्चे उस्ताद थे जो अशफाक को तराशकर देश हित हेतु
तैयार करने में खूब मददगार साबित हुए। सत्य है कि अशफाक को
तराशने का यही समय था जब बाल मन के हृदय में ऐसा बीज बोया जा
सके जो आगे चलकर वृक्ष बनकर पूरे समाज की अपनी छाया और अपने
फल से सेवा कर सके। युवा वर्ग में उत्साह और प्रेरणा भर सके। मौलवी
साहब की शिक्षाओं ने जाने-अनजाने अंग्रेजों के प्रति नफरत पैदाकर दी
थी। यदि उनके बाल मन और युवा ऊर्जा की तुलना करें तो स्पष्ट हो
जायेगा कि वे एक जांबाज सिपाही, एक विश्वसनीय और निष्ठावान
कार्यकर्ता थे। वे मातृभूमि हेतु सब कुछ न्यौछावर कर देने वाले मानव
थे। उनकी बहुमुखी प्रतिभा से प्रायः सभी प्रभावित रहते थे।
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