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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 36, कुल 297 में से

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पृष्ठ 36

इस काण्ड के तहत लालारामाधीन, राम प्रसाद बिस्मिल, देवनारायण,
गंगा सिंह चन्देल, राजाराम बाजपेयी, कालीचरन शर्मा ने उल्लेखनीय
भूमिका निभाई। सर्वविदित है कि यही मैनपुरी काण्ड है जिससे प्रेरित
होकर अशफाक उल्ला ने भारत को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने का
संकल्प लिया। इसके बाद अशफाक उल्ला पं० राम प्रसाद बिस्मिल के
सम्पर्क में आये, लेकिन प्रथम मिलन में अशफाक को निराशा हाथ लगी।
लेकिन होना तो कुछ और ही था। तमाम आरोहों-अवरोहों के बाद कट्टर
मुस्लिम परिवार के अशफाक और आर्य समाजी पं० राम प्रसाद बिस्मिल
के बीच धार्मिकता जैसी बात आड़े नहीं आई और वे एक दूसरे के गहरे
मित्र बन गये। अब क्या था अशफाक की प्रसन्नता का पारावार न था।
वे एक ऐसे क्रांतिकारी के मित्र बन गये जिनके नाम के स्मरण मात्र से
ओज भर जाता था। दो देश-भक्त एक जान, एक मन, एक काम, एक
विचार हो गये और यह गति अशफाक को ऊँचाई पर ले जाकर ही दम
ली। भेद भाव के सारे प्रश्न समाप्त हो गये थे। राम प्रसाद बिस्मिल ने
जिन युवकों को शाहजहाँपुर में क्रांतिकारी दल की ओर प्रवृत्त किया उन
युवकों में अशफाक उल्ला खाँ प्रमुख थे। जांबाज अशफाक उल्ला जब
क्रांतिकारी दल में सम्मिलित हो गये तो उन्होंने इस धारणा को मिथ्या
सिद्ध कर दिया कि मुसलमान भारत की स्वाधीनता के लिए बलिदान
करने में पीछे रहने वाले हैं। राम प्रसाद बिस्मिल का साथ मिल जाने के
कारण अशफाक का जीवन ही भिन्न हो गया। अब वे सामान्य नागरिक
नहीं रह गये थे। अब वे देश के लिए जरूरी थे। वे इतिहास के लिए
आवश्यक थे। वे क्रांतिकारी यात्रा में प्रमुख मार्ग थे।
देश के लिए मर मिटने वाले उन विशेष लोगों में वे थे जिनका सारा
धर्म, कर्म, विश्वास, दिनचर्या, विचार सिर्फ राष्ट्र की स्वतंत्रता में लगा
था।
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