अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंराष्ट्र हेतु समर्पित होने का भाव उमाँचे बाँधने लगा था।
अशफाक उल्ला की पारिवारिक पृष्ठभूमि पर एक नजर दें तो स्थिति
और स्पष्ट हो जायेगी। अशफाक उल्ला खाँ अंग्रेजी सरकार की
गतिविधियों की बखूबी जानकारी रखते थे। 1857 से ही अशफाक उल्ला
का मातृपक्ष सरकारी पदों पर कार्य करता चला आ रहा है। किसी भी
व्यक्ति के लिए उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि का खास महत्व होता है।
अध्ययन से पता चला कि अशफाक उल्ला खाँ के पूर्वजों ने सरकार के
लिए जासूसी भी की थी। अशफाक उल्ला खाँ को जब यह ज्ञात हुआ कि
मातृपक्ष (ननिहाल) के लोग अंग्रेजों के प्रति भक्ति भावना रखते है तो वे
स्वयं को (लज्जित) हीन समझने लगे, उन्हें अपने आप से शर्म आने
लगी। लेकिन उन्हें किसी भी भाँति अपने विश्वास को बनाये रखना था।
पितृपक्ष पर जब उनका ध्यान गया तो उन्होंने पाया कि पिता की ओर से
स्वाधीनता के उपासक की सुगंध आ रही है। वैसे अशफाक के पिता सब
इन्स्पेक्टर थे। अशफाक को युद्ध विषयक पुस्तकें पढ़ने का शौक बचपन से
ही था। वे क्रांतिकारियों के विषय में अनेक बातें ध्यान से सुनते थे।
अशफाक खुदीराम बोस और कन्हाई दत्त के सम्पर्क में आये। अशफाक
के दिल में दबा हुआ क्रांतिकारी बीज अंकुरित होने लगा। अशफाक देश
के लिए घातक संकीर्ण मनोवृत्ति का परित्याग कर बिना किसी भेद भाव
के राष्ट्र की एकता और अखण्डता को बचाये रखना चाहते थे, इस हेतु
किसी भी प्रकार के कार्य करने से वे हिचकते नही थे। यह तो स्पष्ट ही
था और सत्य भी कि क्रांतिकारी आन्दोलन राष्ट्रीय मुक्ति संघर्ष की एक
बलवती व प्रभावोत्पादक धारा थी। शचीन्द्र नाथ सान्याल का कथन था
कि 'क्रांतिकारियों ने राष्ट्रीय मुक्ति संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए उत्प्रेरक
तथा पूरक भूमिका निभाई।'
अशफाक उल्ला खाँ को जहाँ सबसे ज्यादा प्रेरणा मिली वह था
मैनपुरी काण्ड। शाहजहाँपुर का महत्वपूर्ण योगदान था मैनपुरीकाण्ड में।
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