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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 34, कुल 297 में से

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.....प्रतीत होता है कि यह सैनिकों का साधारण विद्रोह नहीं, यह विप्लव
है, क्रांति का विस्फोट है।' ¹ राष्ट्रीय चेतना जगाने का काम आर्य समाज
ने भी जमकर शाहजहाँपुर की धरती से किया। स्वतंत्रता की पहली पंक्ति
के शब्द स्वामी दयानंद सरस्वती के मुख से ही निकले थे। क्रांति की
धधकती ज्वाला से भरपूर क्रांति का हवन कुण्ड वैचारिक समिधा से
प्रज्ज्वलित हो रहा था। एक तरफ युवा वर्ग का गर्म खून और दूसरी ओर
वैचारिक आक्रोश के तेजस्वी स्वर.... फलस्वरूप राम प्रसाद बिस्मिल और
अशफाक उल्ला जैसे युवा इस वैचारिक भूमि से अछूते नहीं रहे। राम
प्रसाद बिस्मिल पूर्ण रूप से आर्य समाजी हो गये और उन्हीं के मित्र
अशफाक बिना किसी हिन्दू-मुस्लिम भेद के घनिष्ठ मित्र ही नहीं देश प्रेमी
भी हुए, जिन्होंने राम प्रसाद की ही तरह भारत भूमि को अपने प्राण
न्यौछावर कर दिये। भारतीय क्रांतिकारियों के इतिहास में अशफाक की दी
हुई प्राणों की आहुति सदैव रेखांकित होती रहेगी।
1916 की राजनैतिक घटनाएं महत्वपूर्ण रहीं और शाहजहाँपुर के
मामलों में तो खास थीं। इसी काल में हसरत मोहाली, शौकत अली,
मोहम्मद अली, शमसुद्दीन को नजरबन्द रखा गया।² क्रांतिकारी
परमानन्द को लाहौर षड्यन्त्र केस (1916) के तहत फाँसी की सजा
सुनाकर क्रांतिकारियों को विचलित कर दिया। राम प्रसाद बिस्मिल ने
आर्य समाज मंदिर में स्वामी सोमदेव के समक्ष बदला लेने की प्रतिज्ञा
की।³ सन् 1916 में ही हसरत मोहानी के साथ शाहजहाँपुर में शमसुद्दीन
को भी बन्दी बनाया। अशफाक को क्रांति का वातावरण मिला। वे दिन
प्रतिदिन क्रांति हेतु निखरते चले गये।

  1. दि इण्डियन रिबेलियन, डा०ए०डफ, पृष्ठ 241
  2. पूर्वा-जगदीशचन्द्र दीक्षित, पृष्ठ-83
  3. जांबाज पत्रिका, डा० एन०सी० मेहरोत्रा, पृष्ठ-47
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