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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

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तुलना की जाये तो स्पष्ट हो जायेगा कि नवाब के अधीन इलाके की
जनता ज्यादा सरसब्ज और खुशहाल है।¹ यह तो स्पष्ट तब भी था कि
अंग्रेजी शासन भारतीयों को सुखकर नहीं था। 1857 के प्रमाणिक लेखक
सर जगन लिखते हैं कि 'शाहजहाँपुर में ब्रिटिश अधिकारियों को शहर के
लोगों द्वारा विद्रोह करने का भय था।² सत्ता हमेशा क्रांति से भय खाती
है। अंग्रेज भी विद्रोह से डरे हुए थे और यह भय वास्तविकता में तब
बदल गया जब 31 मई 1857 को लगभग 20-22 विद्रोही तलवार लिए चर्च
में घुस गये। इन विद्रोहियों का जवाहर राय नामक व्यक्ति नेतृत्व कर रहा
था। विद्रोहियों में अन्य प्रमुख विद्रोही थे - गंगा दुबे, महादेव, राम
नारायण दुबे, बिन्द्रा सिंह, रामधीन सिंह, नारायण पाण्डे, ननकूं व शिव
चरण। यह बात और थी कि इन विद्रोहियों को गिरफ्तार किया गया, इन
पर मुकदमा चला, जेल भी गये और फिर मुक्त कर दिये गये।
शाहजहाँपुर की क्रांति में गोरखपुर के मौलवी सरफराज अली का भी
महत्वपूर्ण योगदान था।³ सरफराज अली में विशेष गुण थे। उनका नेतृत्व
कभी असफल नहीं रहता। शाहजहाँपुर अब क्रांतिकारियों का अड्डा बन
गया। अब क्या था युवा का खून उमाँच बाँधने लगा और फिर क्रांति का
दौर रुका नहीं। डॉ० ए०डफ ने लिखा है - 'यदि इस विद्रोह को
बहुसंख्यक जनता का समर्थन प्राप्त न होता और सहानुभूति न मिली
होती और केवल सैनिकों द्वारा किया गया बलवा मात्र ही होता तो प्रथम
दो चार बड़ी विजयों के उपरान्त यह बगावत शान्त हो जाती।


1.वाजिद अली शाह और अवध राज्य का पतन, परिपूर्णानंद वर्मा, पृष्ठ-35
2.हिस्ट्री ऑफ दि इण्डियन म्यूटनी खण्ड-3, सरजान विलियम्स, पृष्ठ-578
3.स्वतंत्रता आंदोलन में शाहजहाँपुर का योगदान, डॉ० एन०सी०मेहोत्रा, पृष्ठ-41

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