अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
पृष्ठ 32, कुल 297 में से
संदर्भ में पढ़ेंशुरुआत हुई।¹ इस क्लब का नाम अनुशीलन समिति रखा गया। यह
समिति 1914 तक निष्क्रिय रही। उसी वर्ष रास बिहारी बोस ने संयुक्त
प्रान्त की गतिविधियों का संचालन अपने हाथ में ले लिया। इसके बाद
तो संयुक्त प्रान्त का क्रांतिकारी स्वर ओज से भर गया। क्रांतिकारी स्वर
के उग्र होने के कई कारण हो सकते हैं लेकिन एक महत्वपूर्ण कारण
'आर्थिक कारण' भी था। लार्ड बेकन ने कहा है कि - 'आर्थिक दरिद्रता
और आर्थिक असंतोष क्रांति को जन्म देता है।'
यह निश्चित है कि असंतोष चाहे जिस प्रकार का क्यों न हो वह
क्रांति को जन्म देता ही है। शाहजहाँपुर भी इससे अछूता नही रहा।
रजनी राय दत्त का मत है कि 1857 के विद्रोह से यह बात साफ हो गयी
कि सतह के नीचे जनता में असंतोष और बेचैनी की भयानक आग
सुलग रही है। इस असंतोष की आग के कारण अंग्रेज शासकों में ऐसी
घबराहट पैदा हुई जो इसके बाद की उनकी सारी कठिनाइयों में दिखायी
देती है।² यह बेचैनी और यह सुलगती आग शाहजहाँपुर में भी थी।
शाहजहाँपुर पर एक नजर दें तो अशफाक के व्यक्तित्व और उनकी
क्रांतिकारी भूमिका का संस्कार स्पष्ट हो जायेगा। रामायण और महाभारत
काल से होता हुआ शाहजहाँपुर वाजिद अली शाह के शासनकाल तक
अपनी पहचान और महत्वपूर्ण छवि पर कायम रहा। अंग्रेज अपने स्वभाव
और अपनी नीतियों के कारण अवध पर कुशासन का आरोप लगाकर
अपने अधिकार में कर लेने का कुचक्र रचने लगे थे। नवाब वाजिद अली
शाह ने आरोपों का खण्डन किया। वे किसी भी मूल्य पर अवध को
ब्रिटिश सत्ता के हाथों नही सौंपना चाहते थे। नवाब ने महारानी
विक्टोरिया को एक स्मृति पत्र दिया कि यदि कम्पनी के शासन के अधीन
कानपुर, फर्रुखाबाद और शाहजहाँपुर के नवाब के अधीन जिलों की
- भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास, रामगोपाल, पृष्ठ-207
- भारत वर्तमान और भावी, रजनीपाल दत्त, पृष्ठ-119
10