सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 30, कुल 297 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 30

1857 के युद्धों में यही प्रान्त मुख्यतः केन्द्र था।¹ उ०प्र० में क्रांतिकारी
आन्दोलन बंगाल से फैला और इस प्रान्त का क्रांतिकारी आन्दोलन
तत्कालीन सत्ता से खासा प्रभावित भी रहा। इसी समय भारत में दूसरी
तरफ क्रांतिकारी आन्दोलन का भी जन्म हुआ। उग्रवादी प्रतिरोध में
विश्वास रखते थे। ब्रिटिश वस्तुओं का बहिष्कार आदि उनके मुख्य साधन
थे, जबकि क्रांतिकारी हिंसात्मक साधनों में विश्वास रखते थे एवं बम व
बन्दूक आदि उनके मुख्य साधन थे। इन दोनों विचारधाराओं के विषय में
निहालसिंह ने लिखा है कि 'इन दोनों में धार्मिक भावना समायी हुई
थी, किन्तु दोनों का मार्ग अलग था। उनमें आत्म बलिदान की भावना
एवं स्वतंत्रता की भावना थी। प्रबल देश प्रेम था एवं विदेशी राज्य के प्रति
घृणा थी।² क्रांतिकारियों में उत्साह भरने का काम समाचार पत्रों ने खूब
किया। नवम्बर 1907 में स्वराज्य नाम से इलाहाबाद से पत्र निकला। यहीं
से सर्वप्रथम इस शांतिपूर्ण प्रान्त में क्रान्तिकारी प्रचार हुआ। इस अखबार
का स्वर प्रारम्भ से ही सरकार के विरुद्ध था। यही नही यह अखबार दिन
प्रतिदिन गरम होता गया। इस पत्र के एक के बाद एक इसके आठ
सम्पादक हुए जिसमें कई को आपत्ति जनक लेखों के कारण लम्बी सजाएं
हुई। इस पत्र ने बड़े जोर-शोर से राजद्रोह फैलाया। यह पत्र क्रान्तिकारियों
के लिए ऊर्जा भर रहा था। इलाहाबाद से ही 1909 में 'कर्मयोगी'
निकला। स्पष्ट है कि लेखनी ने ओज भरना शुरू कर दिया था।
क्रान्तिकारी गतिविधियों पर दृष्टि दें तो बनारस षणयन्त्र से क्रान्तिकारी
गतिविधियाँ अपने चरम पर थीं। बड़े नेतृत्व कर्ताओं के बयान आग में
घी का काम कर रहे थे।


  1. भारतीय क्रांतिकारी आन्दोलन का इतिहास, मन्मथनाथगुप्त, पृष्ठ-84
  2. भारत में राष्ट्रीयता का विकास एस०एल० नागोरी, पृष्ठ-120

8