अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंदादा भाई नौरोजी ने कहा कि - 'यद्यपि जॉन बुल तनिक बुद्धि के
हैं, परन्तु यदि उसे एक बार कोई बात सुझा दी जाये कि वह अच्छी और
उचित है तो आप उसे कार्यरूप में परिणित किये जाने के प्रति विश्वस्त हो
सकते हैं। ‘‘दादा भाई नौरोजी का अंग्रेजों की न्यायप्रियता में विश्वास
था। वे यह भी कहते थे कि हम पुरुषों की तरह बोलें और घोषणा कर दें
कि हम पूर्णतः राजभक्त हैं। अंग्रेजों की न्यायप्रियता पर किसी बड़े नेता
को शायद ही संदेह हो। गोपाल कृष्ण गोखले ने कहा था - 'अंग्रेज जाति
की न्यायप्रियता तथा उदारता में हमारी अबाध निष्ठा है।' चाहे फिरोजशाह
मेहता हों या सर टी० माधवराव, प्रायः सभी ने अंग्रेजों की न्यायप्रियता
के गुण गाये। डॉ० सीता रमैया का यह कथन उल्लेखनीय है कि -
'उदारवादी नेता इस बात पर विश्वास करते थे कि अंग्रेज स्वभाव से ही
न्यायप्रिय होते हैं। अतः यदि उन्हें भारतीय दृष्टिकोण का सही ज्ञान करा
दिया गया तो वे भारतीय दृष्टिकोण को स्वीकार कर लेंगे।¹ लेकिन प्रश्न
था कि भारतीय मानसिकता का ठीक प्रकार से परिचय कौन देगा। खास
बात यह भी थी कि क्रान्तिकारी अंग्रेजों का गुण नहीं गाते थे। चाहे
न्यायप्रियता हो या शासन-सत्ता, कोई भी विषय/प्रकरण हो, अंग्रेज सुपाच्य
नहीं थे। क्रांतिकारियों को दासत्व का बोध होता था।
1857 के बाद यह लगता था कि आजादी की जंग समाप्त हो गयी
है लेकिन ऐसा नहीं था। क्रांति के बीज हृदय में अंकुरित होते रहे, फूटते
रहे, बढ़ते -पकते रहे। यही कारण है कि मनुष्य की जीने की इच्छा
जिजीविषा संघर्षों हेतु प्रेरित करती है और इतिहास का निर्माण करती है।
महात्मा गाँधी के भारतीय राजनीति में आने के पहले स्वतंत्रता के नाम
पर जो कुछ भी घटा वह क्रांतिकारियों की भूमिका ही थी।
- भारत में राष्ट्रीयता का विकास, डा० एस एल नागोरी, पृष्ठ 86
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