अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंक्रान्तिकारियों को जाने-अनजाने इनसे ऊर्जा मिलती रही। बीसवीं
सदी तक आते-आते किसानों का प्रतिरोध साम्राज्यवाद-विरोधी
प्रतिरोध में समाहित हो गया। किसान साम्राज्यवाद-विरोधी आन्दोलन में
शरीक हो गये। अंग्रेजों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आन्दोलन में किसानों ने
अहम भूमिका निभाई।¹
गीता में कहे गये वचन कि 'अन्याय के साथ समझौता नहीं,
अपितु उसका निवारण करो' के अनुसार भारतीय जनता अपने हक हेतु
संघर्ष कर निवारण करने का संकल्प ले चुकी थी। 1885 से 1905 के बीच
ऐसी घटनाएँ घटीं जिससे युवाओं का अंग्रेजों की न्याय प्रियता से विश्वास
उठने लगा था। 1885 में काँग्रेस का जन्म हुआ। उस समय हमें कोई
क्रांतिकारी शक्ति देखने को नहीं मिलती, जो कांग्रेस के पीछे रही हो या
साथ निभाती रही हो। क्रांतिकारी विचार का कोई व्यक्ति कांग्रेस में नहीं
था। मन्मथनाथ गुप्त ने लिखा है कि 'कांग्रेस का जनता से उस समय
कोई सम्बन्ध नही था, इसलिए उसकी कोई पूछ भी नहीं थी। कांग्रेस के
आरम्भ के बीस वर्ष तक उस पर उदारवाद का प्रभाव रहा।² कांग्रेस
समय-समय पर इग्लैंड में अपने शिष्ट मंडल भेजती रही। जिसका फल
यह हुआ कि ब्रिटेन में भारतीय मांगों के प्रति सहानुभूति रखने वाला एक
वर्ग बन गया। सुरेन्द्रनाथ बनर्जी के अनुसार 'अंग्रेजों की न्याय, दया
तथा बुद्धि की भावना में हमारा दृढ़ विश्वास है। संसार की महानतम
प्रतिनिधि सभा, संसदों की जननी, ब्रिटिश कॉमन्स सभा के प्रति हमारे
हृदय में श्रद्धा है। अंग्रेजों ने सर्वत्र प्रतिनिध्यात्मक आदर्श पर ही शासन
की रचना की है।' कांग्रेस के बारहवें अधिवेशन में रहीमतुल्ला सयानी ने
कहा-‘अंग्रेजो से बढ़कर सच्चरित्र तथा सच्ची जाति इस सूर्य के प्रकाश के
नीचे नहीं बसती।'³
- भारत का स्वतंत्रता संघर्ष, विपिन चन्द्र, पृष्ठ-28
- भारत में राष्ट्रीयता का विकास, डॉ० एस०एल० नागोरी, पृष्ठ-85
- एनीबेसेन्ट : हाउ इण्डिया रॉट फोर फ्रीडम, पृष्ठ-232 से उद्धृत
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