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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 25, कुल 297 में से

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1857 का विद्रोह भारतीय इतिहास की एक बहुत महत्वपूर्ण घटना थी
और इसमें संदेह नही है कि भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन की गिनती
आधुनिक समाज के सबसे बड़े आन्दोलनों में की जाती है।¹ इस
आन्दोलन को कोई भी नाम मिले लेकिन यह सत्य प्रतीत होता है कि
यह एक व्यापक जन आन्दोलन था, इसे भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम
कहा जा सकता है। क्रांति के इस संग्राम को पाकिस्तानी इतिहासकारों ने
आजादी की जंग कहा है।² 1857 तक अंग्रेज भारत में शक्तिशाली तो हो
ही चुके थे। देशी राजे और जनता दोनों ही आतंकित थे। लेकिन यह
सत्य है कि शासन सदैव आतंक से नही चलाया जा सकता था। हाँ यह
हो सकता है कि कोई बुद्धिमान विदेशी शासक अपनी नीति कुशलता से
किसी देश में अपना शासनकाल बढ़ा सकता है लेकिन आतंक के बल पर
उसे स्थायित्व प्रदान नहीं कर सकता। 1857 का विद्रोह भले सफल नहीं
हुआ लेकिन उसके अनेक अनुभव प्राप्त हुए। अनुभव का धरातल चाहे
अंग्रेज हो चाहे भारतीय। अंग्रेजों ने अनुभव किया कि हिंसात्मक कार्यों में
वे भारतीयों से बढ़कर हैं। भारतीयों ने अनुभव किया कि उनमें आपस में
फूट थी, कुछ अंग्रेजों के पक्ष में, कुछ विद्रोह में सहायता दे रहे थे। साथ
ही उन्होंने यह भी अनुभव किया कि जो संगठन उन्होंने बनाया था वह
देश के दूर-दूर के भागों को अपने में समेटने में समर्थ नही था।³ तमाम
आरोहों अवरोहों के बावजूद क्रान्ति जब एक बार मन में बैठ जाती है तो
परिणाम तक जाये बिना थम नहीं सकती। क्रांति की यात्रा धीमी पड़
सकती है, घटनाएं थम सकती हैं लेकिन भीतर की आग सुलगती रहती
है। राख के ढेर में कहीं न कहीं एक चिंगारी जीवित रह जाती है।


1- भारत का स्वतंत्रता संघर्ष, विपिन चन्द्र - पृष्ठ XIII
2. द इंडियन पोलिटिकल सिस्टम, नार्मन डी० यामर, पृष्ठ-83
3. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास, पृष्ठ-27
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