अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविजयी क्रांति ने नया प्रभात देखा था और हम 1947 में स्वतंत्र राष्ट्र के
इतिहास का शुभारम्भ देख सके।
भारत के इस महान आन्दोलन का शुभारम्भ स्वतंत्रता संग्राम (1857)
के क्रांतिकारी पृष्ठभूमि से हुआ। इस संघर्ष का प्रारम्भ सिपाही मंगल
पाण्डे के विद्रोह से हुआ जिसे कुछ इतिहासकारों ने 'सिपाही विद्रोह' की
संज्ञा दी। लेकिन अनेक ऐतिहासिक खोजों/अनुसंधानों से यह भी सिद्ध
हो जाता है कि यह देश की गुलामी के विरुद्ध एक सुनियोजित जनक्रांति
थी। इसे ब्रिटिश सत्ता द्वारा कुचलने का पूरा प्रयास किया गया। अंग्रेजी
सत्ता ने किसी को तोप से, किसी को तलवार से और अनेक
क्रांतिकारियों को फाँसी के तख्ते पर लटका कर इस इनकलाब को दबाने
की पूरी कोशिश की। फाँसी का फन्दा हो या बर्बर शासकों द्वारा कठोर
कारावास का असहनीय कष्ट, राष्ट्रप्रेमी वीरों की राष्ट्र उपासना और
गगनचुम्बी साहस को कोई भी सत्ता वैचारिक धरातल पर दबा न सकी
थी। स्वतंत्र भारत के निर्माण में अनेक वीरों ने अपने प्राणों की आहुतियां
मुस्कुराते हुए दी। यह दिगर बात है कि कुछ ऐसे भी नाम है जिनका
उल्लेख इतिहास की पुस्तकों में नही हुआ।¹ लेकिन ऐसे भी महत्वपूर्ण
नाम हैं जिनका उल्लेख इतिहास की पुस्तकों की गरिमा बढ़ाता है। आज
की पीढ़ी उन नामों से ऊर्जा पाती है और गौरवान्वित होती है। यही
कारण है कि भारतीय राष्ट्र के जीवन में समाजवाद से लड़ने वाली जुझारू
शक्तियाँ आज भी हमारे पुरुषत्व, हमारे जीवन और हमारे राष्ट्र-प्रेम को
रह-रह कर चुनौती दे रही हैं।
1- काकोरी स्मृतिदिवस शहीद प्रस्तावना लेखक - (हेमवतीनंदन
बहुगुणा) - डा० भगवानदास माहौर
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