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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 216, कुल 297 में से

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पृष्ठ 216

• शहीदाने-वतन का खून एक दिन रंग लाएगा,
चमन में फूट निकलेगा यह बरगे-अर्गवाँ होकर।
• फ़कत दारोरसन ही कामयाबी का ज़रिया है,
मकासिद तक यह पहुँचाएगी हमको निर्दबाँ होकर
• नहीं वाकिफ़ ये मादर और पिदर इस अमरे-शुदनी से,
कि आफ़त में पड़ेंगे उनके बच्चे नौजवाँ होकर।
• सता ले ऐ फलक मुझको जहाँ तक तेरा जी चाहे,
सितम परवर सितम झेलूँगा शेरे नेसताँ होकर।
• करूँ मैं इन किलाबे दहर का शिकवा मआज अल्लाह,
है तुफ़ मुझे पर डरूँ गर जेल से मैं नौजवाँ होकर।
• दलहता है कलेजा दुश्मनों का देखकर 'हसरत',
चला करते हो जब बेड़ी पहनकर शादमाँ होकर।¹
(11) कुछ शेर-अशआर
• आनी थी हमको मौत सो आई वतन से दूर,
अब देखना ये है कि ये मिट्टी कहाँ की है।
• बहुत ही जल्द टूटेंगी गुलामी की ये जंजीरे,
किसी दिन देखना आज़ाद ये हिंदोस्तां होगा।
• जिन्दगी बादेफ़ना तुझको मिलेगी हसरत,
तेरा ज़ीना तिरे मरने की बदौलत होगा।

  1. अशफाक उल्ला और उनका युग, सुधीर विद्यार्थी, पृष्ठ -88-89
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