अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
पृष्ठ 214, कुल 297 में से
संदर्भ में पढ़ें• वचन की आबरू का पास देखें कौन करता है,
सुना है आज मक़्तल में हमारा इम्तहाँ होगा।
• ये आये-दिन की छेड़ अच्छी नहीं ऐ खंज़रे-क़ातिल,
बता कब फैसला उनके हमारे दरमिया होगा।
• शहीदों के मजारों पर लगेंगे हर बरस मेले,
वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशाँ होगा।
• कभी वो दिन भी आएगा जब अपना राज़ देखेंगे,
जब अपनी ही ज़मी होगी, जब अपना आसमाँ होगा।¹
(8)
• जमाना बना यूँ न दुश्मन किसी का,
खिज़ाँ से लुटा यूँ न गुलशन किसी का।
• रहा एक बुलबुल भी जिसमें न बाक़ी,
फ़साना जो उजड़े चमन का सुनाती।
• हमें ख़ाक में वो मिलाये हुए हैं,
ज़माने के रौंदे सताये हुए हैं।
तनज्जुल के चक्कर में आये हुए हैं,
कि अपने ही घर में पराये हुए हैं।
• ये सब कुछ सही है, मगर जान तन में है,
शरारा है ये अपने ठंडे अगन में।।²
- अशफाक उल्ला खाँ, भवान सिंह राणा, पृष्ठ - 159-160
- अशफाक उल्ला खाँ, भवान सिंह राणा, पृष्ठ - 160
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