अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
पृष्ठ 211, कुल 297 में से
संदर्भ में पढ़ें• ज़िब हसाई दरे-हज़रत की हसरत अपना ईमाँ है,
मुबारक हज़रते वाइज़ को ख्वाहिश बागे-रिज़बा की।¹
(2)
• वह रंग अब कहाँ है नसरीनो नसतरन में,
उजड़ा पड़ा हुआ है क्या ख़ाक वतन में।
• कुछ आरज़ू नहीं हैं, है आरज़ू तो यह है,
रख दे कोई ज़रा-सी खाके-वतन कफ़न में।
• ऐ पुख्ताकारे उलफ़त हुशियार डिग न जाना,
मेराज़े आशिकाँ है इस दार और रसन में।
• था नाराए-अनहलक़ और दवाए मुहब्बत,
रखा हुआ था और क्या मन्सूरो कोहकन में।
• मौत और जिंदगी है दुनिया का एक तमाशा,
फरमान कृष्ण का था अर्जुन को बीच रन में।
• जिसने हिला दिया है दुनिया को एक पल में,
अफ़सोस क्यों नहीं है वह रूह अब वतन में।
• ऐ खायनीने मिल्लत ये खूब याद रखना,
हैं बोस और कन्हाई अब भी बहुत वतन में।
• सैयाद जुल्म पेश आया है जब से हसरत,
ऐ बुलबुले क़फ़स में जाओ ज़रा चमन में।²
- काकोरी शहीद स्मृति, भगवान सिंह माहौर पृष्ठ -228
- काकोरी शहीद स्मृति, सम्पादक-भगवानदास माहौर पृष्ठ -227-228
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