अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
पृष्ठ 209, कुल 297 में से
संदर्भ में पढ़ेंमैं आपको अपनी दीदी मानता हूँ। आप मुझे भूलेंगी नहीं।
प्रसन्नचित रहिए यह भी जानिए कि मैं वीरगति प्राप्त कर रहा हूँ। सबको
प्रणाम।¹
आपका,
अशफाक उल्ला खाँ
वारसी,
(मूल हस्ताक्षर अंग्रेजी में)
अपठनीय हस्ताक्षर --------------------
मोहर
ले०कर्नल आई०ए०एस
सुप० जेल, फैजाबाद।
अशफाक उल्ला की समझ व्यापक है वे एकता के पक्षधर थे
खासतौर पर साम्प्रदायिक एकता के। राम प्रसाद बिस्मिल के विषय में
उनकी मित्रता और विचार उल्लिखित ही है और यह पत्र-भाषा से ही ज्ञात
होता है कि वे हिन्दुस्तानी होने का गर्व महसूस करते हैं। हिन्दू को हिन्दी
शब्दों से सजा कर पत्र लिखने वाले अशफाक में साम्प्रदायिक एकता की
कितनी मजबूत संवदेना पल रही थी, यह ज्ञात होता है। अशफाक अपने
परिचितों के परिवार का भी हाल चाल लेना, संदेश देना नही भूलते।
अशफाक उल्ला खाँ की काव्य रचनाएँ -
(1)
• बहार आई हुई शोरिश जुनूने फितना सायाँ की,
इलाही खैर करना तू मेरे ज़ेबो गरीबाँ की।
• सही जज़बाते हुर्रियत कहीं मेटे से मिटते हैं,
अबस हैं धमकियाँ दारोरसन की और ज़िंदाँ की।
- अशफाक उल्ला और उनका युग, सुधीर विद्यार्थी, पृष्ठ 145
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