अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंबनारस बम काण्ड में गिरफ्तार हुई शचीन्द्रनाथ बख्शी की बड़ी बहन
नलिनी से भी खूब प्रभावित थे। अशफाक नलिनी को 'दीदी' कहते थे।
नलिनी क्रांतिकारियों को आवश्यक संदेश भिजवाती थी। फाँसी घर से
अशफाक ने नलिनी को एक मार्मिक पत्र लिखा है जो निम्नवत् है -
फाँसी घर
फैजाबाद जेल
16.12.1927
अलविदा
मेरी स्नेहमयी दीदी,
मैं अब दूसरी दुनिया में जा रहा हूँ जहाँ दुनियावी मुसीबतें नही
रहेंगी और जीवन को ज्यादा उत्तम बनाने के लिए संग्राम करने की
जरूरत होगी। जहाँ न मौत होगी न मरने का प्रश्न! दीदी! मैं मरने जा
रहा हूँ वरन वस्तुतः अमरत्व प्राप्त करने जा रहा हूँ। जब कभी मेरे साथी
बख्शी जी रिहा हों, उन्हें बताइएगा कि मैंने स्थिर मन तथा प्रसन्नचित्त
होकर जिन्दगी की आखिरी साँस पूरी की है।
अगला सोमवार मेरे जीवन का अन्तिम दिन होगा। आपको मौका
मिले, तो अंतिम बार इस भाई से मुलाकात कर जाइएगा। अगर अनुकूल
परिस्थिति न हो, तो आप सब लोगो से हमेशा के लिए यही से विदा
लेता हूँ। मेरा आखिरी प्रणाम स्वीकार कीजिए और विदा दीजिए। आपको
बाद में पता चलेगा कि मैंने मृत्यु को कैसे अपनाया है। खुदा आप सबके
साथ रहे। बाबा को मेरा विनम्र प्रणाम कहिएगा। सावित्री, गौर, कानू
तथा अन्य बच्चों को प्यार। नेपाल को मेरा नमस्कार। सब बड़ों को
प्रणाम तथा छोटो को प्यार। मेरी यह अभिलाषा है कि आप सबको एक
बार फिर से देखूँ। अगर सम्भव हो तो आप लोग आ जाइएगा। खुदा का
ख्याल कीजिए और मेरे लिए दुखी न होइएगा। मेरे विषय में बख्शी जी
को खबर दीजिएगा।
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