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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 202, कुल 297 में से

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पृष्ठ 202

खुशियाँ मनाई गयी थी। शुक्राने अदा किये गये थे और किस्सा मुख्तसर
यह कि मुझको आँखों का नूर और दिल का सुरूर समझा जाता था।
आपने इस सिले में खुदा को क्या दिया कि उसने आपको एक इनसान
की शक्ल में औलाद दी। आपसे जो भी पूछता था आप यहीं कहती थीं
कि खुदा का बंदा है, खुदा ने दिया है। उसी की अमानत है और मैं
अमानतदार हूँ। बस अब मालिक अपने गुलाम को तलब करता है।
अमानत रखने वाला अपनी अमानत तलब करता है। आप खयानात न
करे, न आपकी चीज थी न आपसे छीनी गई। इतने दिन के वास्ते
आपको दी गई थी कि रखो, बाद को हम वापस ले लेंगे। अब वापस
लिया जा रहा है फिर आपको क्या हक है कि रद्दोकद करें। क्या आपने
हमेशा से यह सोचा था कि मुझे मौत कभी न आएगी। अरे, तुम भी
जानती थी और मुझे भी मालूम था कि हम तुम सब मरेंगे, कोई आगे
कोई पीछे। या तो मुझको रोना पड़ता तुम्हारे लिये या तुम्हें मेरे लिए।
उसका मंशा यह था कि बूढ़ी माँ जवान औलाद को रोयेगी और बाकीया
तीन भाई अपने छोटे भाई का मातम करेंगे। तो क्या कोई, आज इस
दुनिया में इतनी ताकतवाला है कि खुदाबंद के अहकाम पलट दे? कोई
नहीं। अपने खानदान ही में कितनी ऐसी माँएँ हैं जो बुढ़ापे में जवान
औलाद का दाग खोए बैठी हैं और कितने ऐसे भाई हैं जो अपनी आँखें
अपने भाई के लिए सुर्ख कर चुके है और कितनी ही बहनें, भावजें,
भतीजियाँ, भतीजे, भानजियाँ, भानजे हैं जो कि भाई, देवर, चाचा, मामू
के लिए सीनाकोबी कर चुके हैं। दुनिया का यही धंधा है। दुनिया नाम
ही उसका है। अगर मरना न होता तो जिन्दगी का फायदा ही क्या था।
अगर रात न हो तो दिन में लज्जत ही क्या। अगर गम न हो तो
शादी-ब-मंजिले ग़म है। गरज कि दुनिया एक माज़ने मुरक्कब है। जिसमें
सब जाइके हैं। ऐशो मसर्रत, गमों अंदोह, आराम व तकलीफ, गफलत व
बेघणी, नेकी व बदी, मौत व जीस्त, गरज कि हर चीज यहाँ मिलेगी।

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