सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 203, कुल 297 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 203

पास खुशकिस्मत वह है जिसने अच्छी बातें कुबूल की और बुराइयों
से परहेज किया। गलफत पर होशियारी की तरजीह दी और माबूदे हकीकी
की याद में लगा और होशियार रहा अपने फराइज़ की अदायगी में। नेकी
को कबूल किया और बदी को ठुकराया। अबदी आराम की खातिर
तकलीफ बरदाश्त की और इबादत में मसरूफ़ रहा, मौत को पेशेनजर रखा
और जीस्त ही में सामाने आसरत जमा कर लिया।
ऐश व इशरत में पड़कर गफलत नहीं की और पेश आने वाले गम
व अंदोह का खटका महसूस करता रहा। जिसने इन बातों को अख्तियार
किया और हर मुसीबत व तकलीफ व आराम व राहत को मिनजानिब
अल्लाह तस्सवर किया और उसकी निआमतों का शुक्रिया अदा किया।
इसाइब व तकलीफ पर सब्र किया और कहा कि यह सब मिन जानिब
अल्लाह हैं।
दोस्त का दिया हुआ जहरेहलाल भी शहद मसफ्फा ख्याल किया
और सब्र किया, शुक्र किया यस राजी का लिया उसे जो कौनैन का
मालिक और मशरिक व मगरिब का रब है। क्या तुम इसके ख्वाहिशमंद
नहीं हो कि खुदा तुम्हारा पैदा करने वाला है और जिसके सामने तुम्हें
जाना है, तुम्हें अपना दोस्त कहकर पुकारे। अरे दुनिया उसकी मुतयन्नी
है और वह हमको अपना दोस्त कहे। आज मौत के सामने बैठा हुआ
अशफाक कुछ ख्वाहिश नहीं रखता, मगर हाँ यह कह दे कि अशफाक मैं
तुमसे राजी हूँ और तू मेरा बंदा है मैंने बंदानी में कबूल किया। वह
कहता है कि ऐ ईमान वालो! बेशक अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है।
दूसरी जगह फरमाता है यानी खुशखबरी सुना दो उन सब्र करने वालों
को कि जब कोई उनको मुसीबत पहुँचती है तो कहते हैं कि बेशक हम
अल्लाह ही के हैं और बेशक हम उसकी तरफ लौटने वाले हैं। फिर
फरमाता है यानी यही हैं जिसपर बरकत है उनके रब की तरफ से और
रहमत है। यही लोग हिदायतवाले हैं। यह कौल आपको जनाबे बारी के
लिख दिए। अब समझना न समझना आपका काम है।
174