अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसकता। मगर यह मसला मजबूरी और इज्जत व जिल्लत का था।
लिहाजा उन लोगों के कहने पर नहीं चला। क्योंकि जिन्दगी जैसी जलील
चीज के लिए दुनिया की नजरों में और अपनी नजरों में गिरकर रहने से
मौत बेहतर व अफजल है। काश कि खुदा एक मौका और अता करता कि
आपकी खिदमत करूँ और कदमों से जुदा न हूँ। मैं निहायत बदकिस्मत
हूँ कि आपकी खिदमत करने का जब मेरा वक्त आया तो आपके कदमों
से दूर हूँ। खैर खुदा की मर्जी यही थी। आप भी सब्र कीजिए और मेरे
लिए दुआ कीजिए। आपको जईफी में जो मुझसे दुख पहुँचा, आप खुदारा
मुझे माफ फरमाइएगा। तब दिल को तस्कीन होगी। ज्यादा क्या लिखूँ।
हाँ एक बात और वह है कि मेरे फैसले के बाद लोगों को ढोंग न फैलाने
देना, जो बिहीख्वाह और दोस्त थे, सब मालूम हो गये। आपके खानदान
वालों को भी देख लिया। मेरा खानदान मेरे हकीकी भाई, मेरी भावज,
बहन व बहनोई हैं और मुल्क के हिन्दू और मुसलमान मेरे भाई व बुजुर्ग
हैं और किसी बदमाश से वास्ता नहीं। जो मुसीबत में शरीक था, वह
बहादुर और दोस्त है। बाकी सब कमीने हैं, जो आरामो-आसाइश के
साथी और दुख दर्द पर अलग। मैं कसम खाकर कहता हूँ कि मैं उन
सबसे नाराज हूँ। अगर बाहर निकलने का मौका मिल गया तो उनसे
कितात आल्लुक करके जानवरों से दोस्ती कर लूँगाँ। साँपों से प्यार
करूँगा। भेड़ियों के गिरोह में बैठा रहूँगा, मगर इन अजीजों से अलग
रहूँगा। फीअमानिल्लाह। अपना फोटो जरूर खिंचवाइएगा और जिन्दा
बाहर निकला तो मेरे लिए वही काफी होगा।
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