अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
पृष्ठ 198, कुल 297 में से
संदर्भ में पढ़ेंअशफाक पत्रों में आने वाले संतानों का जिक्र करते हैं और उत्साह भरते
है, नेक सलाह तो देते ही हैं, देश प्रेम की प्रेरणा भी देते है। उन्हें यह
पता है कि आने वाली पीढ़ियाँ उनकी कुर्बानी से ऊर्जा पायेगीऔर देश के
लिए कुछ कर गुजरने के लिए प्रेरित होंगी। अशफाक को बच्चों से प्रेम
था, वे उपदेश देते हैं। उन्हें उम्मीद है कि हमारे बच्चे मेरे मुकदमें की
कार्यवाही पढ़ेंगे तो असलियत का अन्दाजा लगा लेगें।
<u>फैसले के एक दिन पूर्व माँ को लिखा गया पत्र -</u>
जनाबा वालिदा साहिबा,
बखैरियत हूँ और जनाबा की खैरियत का ख्वाहा हूँ। कल फैसला
सुनाया जायेगा। खुदा मुझको हिम्मत दे। ताकत इत्मीनान दे। सुकूने
कल्व अता फरमाए। आप सबको सब्र दे। बीवी दुनिया सराय-फानी है।
कौन रहा है और कौन रह जायेगा। अज आदम-ताईदम मौत व जीस्त
का सिलसिला चला आ रहा है और चला जायेगा। कहाँ तक गम कहाँ
तक रंज किया जाय। मुझे अपनी सजा का कोई गम नहीं, कोई रंज
नही। सजाए कैद या कोई भी हो मेरा ईमान है कि सब मिन जानिब
अल्लाह होगी। फिर 'सरे तसलीम खम है जो मिज़ाजे यार में आए'।
मगर जो दुख है वह तुम्हारी जईफी का है। तकलीफ है वह तुम्हारी
कमजोरी और काबिले-रहम हालत पर। खुदा वाकिफ है कि इस इतवार
की मुलाकात के बाद किसी घड़ी किसी पल तुम्हारा कमजोर चेहरा और
नाउम्मीदी से भरे हुए अल्फाज फरामोश नहीं कर सका। खैर, जो मर्जी
मौला। मेरी गुजारिश और आखिरी गुजारिश यह है कि अगर खुदा ने
जिन्दा मुझको बाहर निकाला, तो आपकी जईफी देखकर जिसकी मुझको
उम्मीद तो है नहीं, वैसे दुआ है कि खुदा आपको उम्रेनूह अता फरमाएं।
आप अपनी तस्वीर हिंगू से खिंचवा लीजिएगा। आप कुछ फिक्र न करें।
वह आपका दामाद है और सामने आता है यानि साफिया का खाविंद।
कम-अज-कम बाहर आकर आपकी तस्वीर से कुछ तसल्ली होगी। आप
बखूबी वाकिफ है कि आपको बिना देखें हुए मैं दो रोज भी नहीं रह
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