अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमेरे शुकून की वजह मेरी बेगुनाही है और यकीन रखिये कि
अशफाक का दामन इन्सानी खून के धब्बों से पाक व साफ है।
मेरे घर में आने वाले बच्चों और मौजूदा छोटो। तुम सब दुनिया में
आओगे मेरी कहानी सुनते पाओगे और तहरीर देखोगे। मेरे इस तहरीर
में मेरे दिमाग का असर ना समझना मैं बिलकुल सही दिमाग का हूँ और
मेरी अकल ठीक काम कर रही है। मेरा मकसद महज आने वाले बच्चों
के लिए लिखना यूँ है कि वह अपने फरजाइज महसूस करें और मेरी याद
ताजा रखें। प्यारे रजी व खलील-तुम्हारा चाचा चन्द रोज बाद इस दुनिया
में नहीं रहेगा और हमेशा-हमेशा के वास्ते तुम सबों को छोड़ जायेगा।
तुमसे वह कुछ नहीं चाहता और ना ही कहना चाहता है। तुम्हारा खुदा
मददगार रहे। तुम्हें परवान चढ़ाये। आला-तालीम अता फरमाये और तुम्हें
किसी काबिल बनाये। काबिले फखरे खानदान करे।
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तुमको बुजुर्गों की राय पर चलना चाहिए और तामील में तन-मन
धन लगा देना चाहिए और बेहतरीन इन्सान अपने को साबित करना।
मेरी तुमसे बस इतनी ख्वाहिश है और मौत का ख्याल रखना। वतन की
मुहब्बत का मुझ पर इलजाम लगाया गया है और यूँ ही मुझे सजाए मौत
मिली। जब तुम इस काबिल होगे तब मेरे मुकदमें की कुल कार्यवाही
पढ़ना। ज्यादा क्या लिखूँ। मेरी दुआएँ तुम्हारे साथ हैं।¹
अशफाक उल्ला खाँ
8 अक्टूबर 1927
- अशफाक उल्ला खाँ, भवान सिंह राणा, पृष्ठ 144-147
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