अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंआप हजेला साहब और गुप्ता साहब को लिख दीजिएगा कि मुझको
बराबर मुत्तिला करते रहेंकि रंग क्या है। और नतीजे से मुफस्सिल तौर
पर इत्तला दें। बख्शी के वालिद का क्या रहा? और उनकी बहन वगैरह
गई या अभी नहीं? सब मुफस्सिल लिखियेगा। बख्शी के वालिद के
मुकदमें का फैसला जो भी हो लिखिएगा। अपील यहाँ भेज दी है। कल
नकले-फैसला भी थी। वह खुद वहाँ वापस हो जायेगी। देखिए वकील कौन
लिया जायेगा।
आप लखनऊ चौधरी साहब से आकर मिलिएगा और मेरा सलाम
कह दीजिएगा कि मेरे केस को आप करें और दीगर कार्यवाहियों से
गाफिल न हों। अपील में चौधरी साहब का नाम, हजेला साहब का नाम
लिख दिया है। अब देखिये कौन मिले। मगर आप कौंसिल के मुतालिक
गाफिल न रहिएगा। अपना आदमी चीफ कोर्ट के अन्दर होना जरूरी है।
हजेला साहब से सलाम कह दीजिएगा, ज्यादा क्या लिखूँ। भाई साहब
अगर आएँ और फल लाएँ तो वह गालिबन मुझको मिल सकते हैं।
लखनऊ जेल में बनिस्बत यहाँ के ज्यादा आराम था। आज तक तो वही
खाना मिलता है जो एक अख़लारी मुजरिम को मिलता है। मगर आज
से शायद सुपरिटेंडेंट साहब कुछ बेहतर दें। मगर कहाँ लखनऊ जेल और
कहाँ फैजाबाद -
‘‘हजार शेख़ ने दाढ़ी बढ़ाई सन की-सी,
वलै वह बात कहाँ मौलवी मदन की-सी’’
खैर फीअमानिउल्ला बुजुर्गों की खिदमत में आदाब दस्तबस्ता कुबूल हो।
बच्चों को प्यार, छोटो को दुआ-
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