अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहाँ अगर उनकी याद, उनके कारनामे, उनके आमाल व अकवाल दुनिया
के सामने मौजूद हैं और वह उनसे अच्छा या बुरा नतीजा निकालती है।
दुनिया में आज मुझ पर इन डकैतियों के इलजाम में फाँसकर सजा दे दी
जाए, दे लें, हम बेवश हैं। हाँ मगर हाँ, मुंसिफेहकीकी के यहाँ फैसला
जरूर होगा, वहाँ न सी०आई०डी० की चालबाजी और न पब्लिक
प्रासीक्यूटर के ही आरगूमेंट चलेंगे। दूध का दूध और पानी का पानी
होगा, मुझे इत्मीनान है, मुझे सुकून है, मैं खुश हूँ। मेरा फर्ज और क्या
है, राजी बरजाए मौला रहना।
‘’फैज़े मुहब्बत से है, कैदे मेहन
मेरे लिए एक बलाए हुस्न।’’
खुदा का खुद कौल है दुनिया में कुछ होता है मिनजानिब अल्लाह
होता है। यह हमारा ईमान है।...यह भी खुदा की मर्जी है कि मैं फाँसी
की कोठरी में बन्द किया गया और इसमें भी कोई भलाई योशीदा है जो
बादी उन नजर में हम लोगों को नहीं मालूम होती। आप लोगों को
सब्रो-शुक्र से काम लेना चाहिए और जनाबे वालिदा साहिबा को अपनी
नजर खुदा की तरफ करनी चाहिए।
‘’अजब क्या है जो बेड़ा गर्क होकर फिर उभर आये,
कि हमने इनकलाबे चर्खे गरदूँ यूँ भी देखे हैं।’’
खुदा में बड़ी ताकत है, वह सबकुछ कर सकता है। दुआ करना
इनसान का काम है, कबूल करना उनका। अगर जिन्दगी की रस्सी दराज़
है, तो फैजाबाद से एक दिन दूसरी जगह जरूर जायेंगे। वरना यहीं से
जिन्दगी की आखिरी साँस लेकर दुनिया को खैरबाद कहेंगे और फिर
रोजेकयामत ज़मीने फैजाबाद ही से उठकर खुदायेरब्बेजलील से फरयारी
होंगे। बहरहाल अभी तो कुछ महीने उम्मीदे जीस्त है, यह भी बहुत काफी
है। आप सबको मेरा समझाना बेकार है, क्योंकि मैं आप सबका छोटा हूँ।
आप लोग खुद अक्लमन्द है। मेरे मुकदमें की अपील की समायत शुरू
हो गयी होगी। न मालूम कैसा रंग है।
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