अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंबड़े भाई रियासत उल्ला खाँ के नाम दूसरा पत्र
डिस्ट्रिक्ट जेल, लखनऊ
19 जून 1927
खत बनाम रियासत उल्ला खाँ,
भाई साहब किबलाबाद, आदाब अर्ज है कि इस इतवार को हस्बे
वायदा आं जनाब का सख्त इन्तजार रहा। आपकी इस इतवार को सख्त
जरूरत थी। खैर अगली इतवार को जरूरत बिल जरूर मय वालिदा
साहिबा वगैरह आइएगा। अब सिर्फ तीन इतवार दरम्यान में हैं। क्योंकि
13 जुलाई को फैसला हो जायेगा। मैंने जो लिफाफा वालिदा साहिबा को
लिखा था, जिसकी बावत आपने कहा था, लेते आइएगा। बख्शी के
वालिदा कानपुर जाने वाले थे। आपका इन्तजार करते रहे, मगर वह
गालिबन आजकल में चले जायेंगे। आप भी ठीक करा लीजिए। मेरी
गजल भी हमराह भेज दीजिएगा, जिसको आपने दरयाफ्त किया था।
बहार आई है शोरिश जनूने सामां की। मगर मुझसे मिलकर जाइएगा।
अलीगढ़ का जाने का इरादा ही रहा, या जाइएगा भी? फैजाबाद भी जरूर
चले जाइएगा। वक्त कम है, लम्बे चौड़े खत लिखने की अब जरूरत नहीं
है। यूँ कार्ड लिख दिया। आप खुद अक्लमन्द हैं। जो मुनासिब समझें
करें। दवा हो चुकी, अब दुआ बाकी है। बब्बन व आशिक वगैरह से
सलाम कह दीजिए। मुलाकात के बारे में भी कह दीजिएगा। फोटो की एक
कापी बख्शी के वालिद को दे दीजिएगा। बख्शी की ख्वाहिश है। मगर
अपने हमराह लाइएगा ताकि हम भी देख लें। ज्यादा क्या लिखूँ।$^1$
- अशफाक वारसी
- अशफाक उल्ला खाँ, भवान सिंह राणा, पृष्ठ -133
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