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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 181, कुल 297 में से

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पृष्ठ 181

मेरे सम्बन्धी किसी भी प्रकार की सहायता करने के बजाय मुझे
दासता के गड्ढे में ही ढकेलना चाहते हैं। वे खेती के महत्व को समझते
ही नहीं कि भारत की स्वतंत्रता किसानों पर निर्भर है। अतः आओ हम
तुम खेती-बाड़ी शुरू कर दें। देखो, देवनारायण और गंगा सिंह खेती-बाड़ी
से कितना लाभ उठा रहे हैं। दो साल बाद बहुत से लोग हमारे साथ आकर
मिलने को तैयार हो जायेंगे। तब हम अपनी योजनाओं को कार्य रूप में
परिपक्व करने योग्य हो जायेंगे।''¹ - वारसी
वारसी कोई और नहीं अशफाक उल्ला खाँ ही हैं जो उपनाम
'वारसी' से रचनाएँ लिखते थे। अशफाक का व्यक्तित्व उक्त पत्र के
माध्यम से स्पष्ट होता है। वे कर्म प्रधान व्यक्ति थे। क्रांति को कर्म से
जोड़ने में उनका विश्वास था। कृषि कार्य को महान कर्म समझना भी
अशफाक को जमीनी सच्चाइयों से जोड़ता है। अशफाक चाहते थे कि वे
अपनी बात आम जनता तक ले जायें। खेती-बाड़ी से एक लाभ तो यह
होगा कि वे किसानों के बीच रहेंगे, अपनी बात कहेंगे, देश प्रेम की
भावनाएं भरेंगे और किसान की सच्चाई जानेंगे। वे आम आदमी की
गहरी पीड़ाओं से परिचित होंगे, समस्याओं पर बहस करेंगे और इसे वे
क्रांतिकारी नेताओं के माध्यम से सत्ता तक अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
शायद यही कारण है कि वे किसान के करीब जाना चाहते हैं। पत्र यह
भी कहता है कि हिन्दू-मुसलमान की एकता के लिए अशफाक संकल्पित
थे। बनारसी को अपना सगा भाई समझते थे।
काकोरी काण्ड में अशफाक पर मुकदमा चला। उन्हें लखनऊ से
फाँसी की सजा सुना दी गयी। अशफाक को फैजाबाद जेल में डाल दिया
गया।

  1. अशफाक उल्ला खाँ और उनका युग, सुधीर विद्यार्थी, पृष्ठ 117से119 तक
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