अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंयह मेरा विश्वास है कि मैं इसी के लिए जीऊँगा और इसी के लिए
मरूँगा। यही मैं अनुभव करता हूँ। शाहजहाँपुर की गलियों में घूमते-घूमते
थक गया हूँ।
तुम जानते हो कि मैं गाँव का मालिक हूँ, मेरी माँ जमींदार है
इसलिए मैं जितनी जमीन चाहूँ मुझे मिल सकती है। मैं खेती-बाड़ी करना
चाहता हूँ। लेकिन उसके लिए मेरे पास आवश्यक धन नहीं है। यदि तुम
भी खेती-बाड़ी पसन्द करो तो इस कार्य में कुछ पैसा लगाओ और आओ
हम तुम दोनों वहाँ चलकर रहें। इस तरह हम अपने किसान भाइयों के
बीच रहेंगे और अपनी योजनाओं को कार्य रूप में परिणत करेंगे और
इस तरह कुछ ही वर्षों में हमारे पास धन भी एकत्र हो जायेगा। तब हम
बड़े पैमाने पर प्रचार कर सकेंगे और दूसरे मित्रों से कहेंगे कि वे भी हमारे
साथ आकर रहे और काम करें। तात्पर्य यह है कि यदि संसार में कोई
पवित्र और लाभदायक काम हो सकता है तो वह खेती ही है लेकिन यदि
तुम न करना चाहो और अगर अस्वीकार कर दिया तो उससे मेरा दिल
टूट जायेगा। तुम्हें हर हालत में अपने बाल-बच्चों के लिए कुछ न कुछ
करना ही पड़ेगा। तब फिर क्यों न खेती ही शुरू कर दी जाय। पूँजी
तुम्हारी, भूमि मेरी और श्रम हम दोनों का। हम दोनों सांसारिक बाधाओं
का सामना करने के लिए गाँव में सगे भाइयों की तरह रहेंगे और संसार
को दिखा देंगे कि संसार में नवयुवकों के लिए कौन सा काम सम्भव
नहीं। परन्तु यह आवश्यक है कि उसका दिल एक हो, इरादा एक हो और रास्ता
एक हो। नंदिया और सालपुर की जमीनें हमारे लिए गोद पसारे हुए है और
फिर प्रेम से हमारी बाट जोह रही हैं। वहाँ के किसान हमारे स्वागत के
लिए तैयार है। इसलिए प्यारे भाई, उन जमीनों को निराश न करो,
किसानों के दिल न तोड़ो और मुझे अपने निर्णय से सूचित करो। क्या
तुम इसके लिए तैयार हो। यदि मेरे पास पूँजी होती तो मैं फौरन काम
शुरू कर देता और तुम्हें अपना भागीदार बना लेता। परन्तु खेद है कि
मेरे पास पाई भी नहीं।
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