अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंइसी तिथि को फोटोग्राफ एक सील्ड कवर में सब-इंस्पेक्टर सिराजुल
हक द्वारा रख दिया गया। 14 सितम्बर को डिप्टी सुपरिटेंडेंट खान बहादुर
इकरामुल हक ने यह जांच की कि यह अच्छी प्रकार से रखा है कि नहीं
ओर वह मालखाना लौटा दिया गया। उसी हालत में 30 सितम्बर को
लखनऊ लाया गया। उसके साथ फोटो और मिले सामान से जुड़ी तमाम
रिपोर्ट भी लायी गयी।¹
महत्वपूर्ण साक्ष्यों से यह प्रतीत होता है कि अशफाक को लेकर
मजिस्ट्रेट सैयद ऐनुद्दीन दिल्ली पहुंचे। जेल छोड़ने के पहले उन्होंने
अशफाक से कहा कि अपनी पहचान छुपाए रखें, क्योंकि पहचान की
विधिक कार्यवाही हो सकती हैं। अशफाक एक बन्द लारी में लखनऊ
स्टेशन से दिल्ली तथा दिल्ली से लखनऊ एक द्वितीय श्रेणी के डिब्बे में
यात्रा की और मुंह पूरा ढका हुआ था। वे एक काले रंग का चश्मा भी
पहने थे।²
सैयद ऐनुद्दीन ने लखनऊ में पब्लिक प्रासीक्यूटर सी०आई०डी० के
द्वारा एक पत्र पाया। इस पत्र में सूचना थी कि गवाह दूसरे मजिस्ट्रेट के
यहां प्रतीक्षा कर रहे हैं। अशफाक को सेन्ट्रल जेल छोड़ने के बाद वे दूसरे
मजिस्ट्रेट के यहां गये। वे वहां से दोपहर में लौटे। सारे गवाह दो मोटर
गाड़ी में जेल लाए गए। मजिस्ट्रेट के समक्ष पहुंचने पर उन्हें जेल ले
जाया गया। वहां कहा गया कि कोई पठान जो अशफाक की शक्ल का
है, इन्तजार कर रहा है। फिर अशफाक से कहा गया कि कुछ बाहरी लोग
जो जेल के नहीं है, उनके साथ मजिस्ट्रेट के सामने परेड करेंगे लेकिन
मजिस्ट्रेट इस व्यवस्था में सफल नहीं रहे। प्रोसीडिंग प्रारम्भ होने के पहले
ही अशफाक ने अपने फोटो के विषय में शिकायत की।
- सी०आई०डी०, वाल्यूम-2, काकोरी षणयंत्र केस-उ०प्र०रा०अभि०, पृष्ठ-105
- सी०आई०डी०, वाल्यूम-2, काकोरी षणयंत्र केस-उ०प्र०रा०अभि०, पृष्ठ-105
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