अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
पृष्ठ 163, कुल 297 में से
संदर्भ में पढ़ेंअताहुसैन खान जो दंगों के लिए दोषी सिद्ध हुए थे, कहा कि - वे
अशफाक और कुछ मुसलमानों के साथ ताजिया जुलूस में थे। यह
अफवाह उड़ाई गई कि करियाटोला मोहल्ले के हिन्दू जुलूस रोक देंगे।
लेकिन ऐसा नहीं हुआ क्योंकि वहां मुसलमान बहुत अधिक है। उन्होंने
हिन्दुओं का समूह देखा था, जिसमें राम प्रसाद बिस्मिल भी थे। उस रात
करियाटोले मोहल्ले में एक मुसलमान की हत्या कर दी गयी थी। उन्होंने
अशफाक से कहा कि कांग्रेस के लोग यह समस्या पैदा कर रहे हैं, परन्तु
अशफाक ने यह कहा कि उन लोगों के साथ बहुत बुरा हुआ।¹
गवाहों के बयान से सिद्ध होता है कि कोई कारण ही नहीं था कि
कहा जाय अशफाक और राम प्रसाद में शत्रुता थी। बिना किसी व्यक्तिगत
विवादों के दोनों व्यक्ति धार्मिक कार्यक्रमों का समर्थन करते हैं। बयानों से
कोई ऐसा सबूत नहीं दिखाई दिया कि इनका हाथ दंगे में था। यह तो
पूर्व में भी स्पष्ट हो चुका है कि क्रांतिकारियों ने धार्मिक प्रश्नों को पीछे
छोड़कर अपने उद्देश्यों हेतु कार्य किया। जो दस्तावेज अशफाक के पास
पाये गये, उससे भी प्रतीत होता है कि अशफाक धार्मिक पूर्वाग्रहों से ऊपर
थे।²
मुख्य बहस अशफाक के पहचान पर थी। यह कहा गया कि कुछ
गवाह अशफाक को अशफाक के रूप में और कुछ बख्शी के रूप में
पहचानते हैं। अशफाक ने यह भी शिकायत की कि किसी व्यक्ति को
उनके साथ सहायता हेतु अनुमति नहीं दी गयी, जो व्यक्ति उनके साथ
न्यायालय में उनका पक्ष रखने हेतु लाये गये, वह उपयुक्त नहीं थे।³
- सी०आई०डी०, वाल्यूम-2, काकोरी षड्यंत्र केस-उ०प्र०रा०अभि०, पृष्ठ-102
- सी०आई०डी०, वाल्यूम-2, काकोरी षड्यंत्र केस- उ०प्र०रा०अभि०, पृष्ठ-103
- सी०आई०डी०, वाल्यूम-2, काकोरी षड्यंत्र केस-उ०प्र०रा०अभि०, पृष्ठ-103
136