अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
DevanagariHindipublished297 पृष्ठ
पृष्ठ 162, कुल 297 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 162उन्होंने यह भी बताया कि अशफाक को भोपाल के सिहोर में
उन्होंने यह भी बताया कि अशफाक को भोपाल के सिहोर में
1 अगस्त (मोहर्रम) के बाद (8 या 10 दिन बाद) देखा था। अशफाक बस
से भोपाल लौट रहे थे। एक अन्य गवाह भागवत सिंह ने बताया कि वे
सिहोर से अस्ता उसी मोटर में गये थे, जिसमें अशफाक यात्रा कर रहे थे,
उस दिन 8 अगस्त की तारीख थी।¹
उपर्युक्त गवाहों के बयान से सरकार को विश्वास नहीं हुआ कि
विशेषकर तिथि को लेकर। उनके कहने के अनुसार अशफाक को भोपाल
स्टेट में देखा लेकिन गवाहों ने 7, 8 या 9 अगस्त को ही देखा, यह
सत्य नहीं है।²
अशफाक और राम प्रसाद 1924 के शाहजहांपुर दंगे में अलग-अलग
थे। इस हेतु अनेक गवाहों को न्यायालय में बुलाया गया। रजा अली
खान जो पेशे से वकील थे ने कहा कि अशफाक ने अता हुसैन के लिए
पैरवी की और राम प्रसाद ने हिन्दुओं के लिए पैरवी की थी। लेकिन कोई
विश्लेषण उपलब्ध नहीं हो पाया कि किस केस की पैरवी की गयी।
मोहम्मद शफी उल्ला खान ने कहा कि उन्होंने अशफाक से दंगे के वक्त
कहा था - 'जो व्यक्ति राष्ट्रवादी है, वे ही झगड़ों में भाग ले रहे हैं।'
करीमुल रजा, वकील ने असहयोग आन्दोलन के समय अपनी प्रैक्टिस
स्थगित कर दी थी। वे अताहुसैन के वकील के रूप में आये थे। उन्होंने
कहा कि अशफाक ने अताहुसैन की पैरवी की थी, क्योंकि वे साथ-साथ
कमरे में रहते थे। यह स्वीकार करते हैं कि अशफाक ने कभी कोई निर्देश
नहीं दिया। उन्होंने यह भी कहा कि राम प्रसाद ने हिन्दुओं की पैरवी
दंगों के लिए की, इस बयान का केवल यह अर्थ है कि मैंने उन्हें हिन्दुओं
के साथ देखा है।³
1.सी0आई0डी0, वायल्यूम-2, काकोरी षड़यंत्र केस- उ0प्र0रा0अभि0, पृष्ठ-100
2.सी0आई0डी0, वायल्यूम-2, काकोरी षणयंत्र केस- उ0प्र0रा0अभि0, पृष्ठ-101
3.सी0आई0डी0, वायल्यूम-2, काकोरी षणयंत्र केस- उ0प्र0रा0अभि0, पृष्ठ-101
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