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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 161, कुल 297 में से

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अशफाक की कविताओं का अनुवाद करके यह भी कहा गया कि
अशफाक कवि हैं। अशफाक ने बेदार एम०एल०सी० की जो लाइनें लिखी
हैं, उसका कारण सिर्फ सोचना था कि वे आन्दोलन ज्वाइन नहीं किये हैं,
जिससे उनका नाम पुलिस के पास न जाय। अशफाक ने कहा कि उनके
परिवार ने सरकार को सहयोग ही दिया है। 1857 के आन्दोलन के समय
उनके परिवार ने परिणाम भी भुगते हैं। उनका परिवार सरकार के
खिलाफ षड़यंत्र के विषय में सोच नहीं सकता। उन्होंने अपेक्षानुसार
इसकी गारन्टी देने को कहा।¹
अशफाक ने डिफेंस में चार गवाह सम्मन किये परन्तु 27 गवाहों का
परीक्षण किया गया। अधिकतर गवाहों ने कोर्ट में कहा कि डकैती के दिन
वे किसी अन्य कार्य में व्यस्त थे। शेष गवाहों से सिद्ध हुआ कि राम
प्रसाद और अशफाक के बीच साम्प्रदायिक दंगों के समय कोई संबंध नहीं
था। उनका परिवार हमेशा आदरणीय रहा। अलीबी सबूतों के आधार पर
यह नोट किया जाना चाहिए कि अशफाक ने न्यायालय या मजिस्ट्रेट के
समक्ष यह बयान दिया कि वे किसी घटना, जैसे जहां डकैती हुई थी,
नहीं गये थे, वे वहां थे भी नहीं। यह सच है कि बहुत सारे गवाहों को
सम्मन किया, परन्तु वे गवाह आये नहीं।²
तीन विभिन्न तारीखों में पांच गवाहों का परीक्षण सिर्फ यह सिद्ध
करने के लिए हुआ कि बमरौली की डकैती वाले दिन अशफाक शाहजहांपुर
के एक गांव में, जहां उनकी भूमि भी थी, शिकार पर थे या नहीं थे।
अशफाक के बड़े भाई ने कहा कि क्रिसमस के कुछ दिन पहले वे कपड़ा
खरीदने शाहजहांपुर आये थे।
1.सी०आई०डी०, वाल्यूम -2, काकोरी षड़यंत्र केस-उ०प्र०रा०अभि०, पृष्ठ -95
2.सी०आई०डी०, वाल्यूम -2, काकोरी षड़यंत्र केस-उ०प्र०रा०अभि०, पृष्ठ -96
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