अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअशफाक का मुकदमा - अशफाक का बयान
अशफाक और शचीन्द्र नाथ बख्शी का मुकदमा बाद में चला। यह
मुकदमा पहले ऐनुद्दीन की अदालत में पेश किया गया। अशफाक के बड़े
भाई रियासत उल्ला खां ने चन्द्रभानु गुप्त के कहने पर श्री कृपाशंकर
हजेला को अपना वकील बनाया। 24 मार्च, 1927 को यह मुकदमा सत्र
न्यायालय भेजा गया।¹
अपने बयान में मजिस्ट्रेट के समक्ष अशफाक उल्ला खान ने अपने
विरुद्ध लगाये गये समस्त आरोपों को नकार दिया। उन्होंने कहा कि वे
राम प्रसाद बिस्मिल, हरगोविन्द, प्रेम किशन, बनारसी लाल और
इन्द्रभूषण को ऐसे ही जानते हैं, जैसे शाहजहांपुर के अन्य निवासियों को।
उन्होंने सफेद और पीले पैकेट से संबंधित जानकारी से इंकार किया। यही
नहीं अशफाक ने अपनी गिरफ्तारी के समय पाये गये समस्त कागजात
और पत्रों को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने बनारसी लाल से किये गये
पत्राचार को भी इंकार कर दिया। यह भी इंकार किया कि वे 25 और 26
अगस्त, 1926 को रायल होटल दिल्ली में 'मुरारी मोहन' के नाम से टिके
थे।²
अशफाक ने स्वीकार किया कि वे 26 सितम्बर, 1925 को पुलिस के
डर से लुप्त हो गये थे क्योंकि उनके नाम के वारन्ट का पता चला था।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि आबिद रजा खान के नाम से दस्तखत
किया लेकिन यह सब मजाक में ही किया गया था। अशफाक ने बयान
दिया कि उनकी पहचान गवाह के द्वारा उनके फोटोग्राफ जो कि पुलिस
के अधिकार में थे, की वजह से हुई जबकि
1.अशफाक उल्ला खाँ, भवान सिंह राणा, पृष्ठ -109
2.सी0आई0डी0, वायल्यूम -2, काकोरी षड़यंत्र केस -उ0प्र0रा0अभि0, पृष्ठ-95
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