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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 158, कुल 297 में से

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पुलिस सादी वर्दी में रहती थी। शिनाख्त के समय भिन्न लोगों के
सामने क्रांतिकारी खड़े किये जाते। शिनाख्त सफल न होती, तब भी
मुकदमा चलाया जाता। कोई भी व्यक्ति जमानत पर नहीं छोड़ा जाता।¹
क्रांतिकारियों की सहायता के लिए एक डिफेन्स कमेटी बनाई गयी,
जिसमें मोती लाल नेहरू, गणेश शंकर विद्यार्थी, शिव प्रसाद गुप्त, गोविन्द
बल्लभ पंत, श्री प्रकाश तथा जवाहर लाल नेहरू किसी न किसी रूप में
सम्बद्ध थे। हरकरन लाल मिश्र, मोहनलाल सक्सेना, चन्द्रभान गुप्त, कृपा
शंकर हजेला, क्रांतिकारियों की ओर से वकील थे। डिफेन्स कमेटी की
ओर से कलकत्ता के बैरिस्टर वी०के० चौधरी को भी मुकदमों की पैरवी के
लिए बुलाया गया था। मोती लाल नेहरू तथा लाला लाजपत राय ने
सार्वजनिक रूप से क्रांतिकारियों के प्रति सहानुभूति प्रकट की। श्रीप्रकाश,
आचार्य नरेन्द्र देव सहित अनेक प्रमुख कांग्रेसी नेता क्रांतिकारियों से जेल
में मिलने गये परन्तु सरकार ने आचार्य नरेन्द्र देव को क्रांतिकारियों से
मिलने नहीं दिया।² गणेश शंकर विद्यार्थी का 'प्रताप' समाचार पत्र
क्रांतिकारियों की सबसे अधिक मदद करता था।
स्पेशल मजिस्ट्रेट ऐनुद्दीन ने मुकदमें को सेशन सुपुर्द करने के
आदेश तैयार करने में अधिक समय लगाया। कारण था कि - प्रत्येक
क्रांतिकारी की अत्यधिक खराब तस्वीर पेश करने में उन्होंने कोई कसर
नहीं उठा रखी। उनके न्यायालय में 28 व्यक्तियों पर मुकदमा चलाया
गया। इनमें तीन क्रांतिकारी क्रमशः शचीन्द्र नाथ बख्शी, चन्द्रशेखर
आजाद और अशफाक उल्ला खाँ फरार रहे। दो क्रांतिकारियों से मुकदमा
उठा लिया गया और दो क्रांतिकारी सरकारी गवाह बनाकर छोड़ दिये
गये। शेष 21 व्यक्तियों को सेशन सुपुर्द किया गया।

  1. पूर्वो, बनारसी दास चतुर्वेदी, पृष्ठ 31-37
  2. दे लिव्ड डेन्जरसली, मन्मथ नाथ गुप्त, पृष्ठ-166
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