अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंकि क्रांतिकारियों को पकड़ने के लिए अधिकतर अधिकारी मुसलमान
ही थे। सुनवाई के लिए ऐनुद्दीन की अदालत भी मानसिकता को
प्रभावित करती है। ऐनुद्दीन अभियुक्तों के सामने मधुर व्यवहार करता
था, लगता था कि यह व्यक्ति क्रांतिकारियों का शुभचिन्तक है, किन्तु वह
विष भरा सोने का कलश था। योगेश चन्द्र चटर्जी ने लिखा है - ''स्पेशल
मजिस्ट्रेट ऐनुद्दीन किसी भी व्यक्ति के पीछे से छूरा भोंकने में निपुण थे।
.......यदि कोई व्यक्ति उनकी शिनाख्त संबंधी रिपोर्ट पढ़ ले तो तत्काल
समझ जायेगा कि वे क्रांतिकारियों के शत्रु थे।¹
ऐनुद्दीन के विषय में राम प्रसाद बिस्मिल ने भी लिखा है -
''दिखाने के लिए कागजी कार्यवाही खूब साफ रखी गयी। जबान के बड़े
मीठे थे। प्रत्येक अभियुक्त से बड़े तपाक से मिलते थे। बड़ी मीठी-मीठी
बातें करते थे। सब समझते थे कि हमसे सहानुभूति रखते हैं। कोई न
समझ सका कि अन्दर ही अन्दर घाव कर रहे हैं। इतना चालाक अफसर
शायद ही कोई दूसरा हो। जब तक मुकदमा उनकी अदालत में रहा,
किसी को भी कोई शिकायत का मौका ही नहीं दिया। यदि कभी कोई
बात हो जाती, तो वह ऐसे ढंग से उसे टालने की कोशिश करते कि किसी
को भी बुरा नहीं लगता। बहुधा ऐसा भी हुआ कि खुली अदालत में
अभियुक्तों से क्षमा मांगने में भी उन्हें संकोच नहीं होता। किन्तु कागजी
कार्यवाही में वे इतने होशियार थे कि जो कुछ लिखा, सदैव अभियुक्तों के
विरुद्ध। जब मामला सेशन सुपुर्द किया और आज्ञा पत्र में युक्तियां दीं,
तब आंखे खुली कि कितना गहरा घाव मार दिया था।² पुलिस की मदद
ऐनुद्दीन ने खूब किया। क्रांतिकारी खुली गाड़ी में पुलिस स्टेशन लाये
जाते थे।
- पूर्वो, योगेश चन्द्र चटर्जी, पृष्ठ -318
- पूर्वो, राम प्रसाद बिस्मिल, पृष्ठ -96
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