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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 156, कुल 297 में से

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शेष 28 व्यक्तियों पर निम्नलिखित अभियोग लगाये गये।
1- धारा 121 - ब्रिटिश सम्राट के विरुद्ध युद्ध की घोषणा
2- धारा 120 - राजनीतिक षड़यंत्र करना
3- धारा 369 - हत्या तथा डकैती
4- धारा 302 - हत्या¹
न्यायिक प्रक्रिया-
काकोरी काण्ड के सभी बन्दी लखनऊ में रखे गये। गुप्तचर विभाग
ने ऐसा प्रबन्ध किया था कि ये बन्दी आपस में न मिल सकें। पहली बार
बन्दी बनाये गये अभियुक्तों को सरकारी गवाह बनाने का खूब प्रयास
हुआ। वैसे तो काकोरी काण्ड में दस व्यक्तियों ने भाग लिया था। लेकिन
28 अभियुक्तों पर चार्जशीट लगायी जानी थी। शाहजहाँपुर के बनारसी
लाल और इन्द्र भूषण मित्र मुखबिर बन गये। डकैती में भाग लेने वाला
बनवारी लाल इकबाली गवाह बन गया। कानपुर का गोपी मोहन भी
गवाह बन गया। कुंवर बहादुर ने भी सरकारी गवाह बनना स्वीकार कर लिया।
सेठ दामोदर स्वरूप गम्भीर रूप से बीमार हो गये, इसी कारण से वे अदालत से
मुक्त हो गये।
काकोरी काण्ड में पहले बन्दी बनाये गये अभियुक्तों पर 4 जनवरी,
1926 को मुकदमा आरम्भ हुआ। अशफाक और शचीन्द्र नाथ बख्शी बाद
में बन्दी बनाये गये। अतः उन पर मुकदमा भी अलग से चला। योगेश
चटर्जी के कथनानुसार - 'उस समय ब्रिटिश सरकार क्रांतिकारियों से
निपटने के लिए मुसलमान अधिकारियों पर विश्वास करती थी। क्योंकि
वह सोचती थी कि क्रांतिकारी आन्दोलन मुख्यतः एक हिन्दू आन्दोलन
था।'² ब्रिटिश सरकार की मानसिकता इससे भी जाहिर हो जाती है।


  1. अशफाक उल्ला खाँ, भवान सिंह राणा, पृष्ठ -105
  2. पूर्वो, योगेश चन्द्र चटर्जी, पृष्ठ -317
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