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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 151, कुल 297 में से

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पृष्ठ 151

ऐनुद्दीन ने अशफाक से कहा - 'तुम अकेले मुसलमान हो, जो इन
हिन्दुओं के साथ फांसी पर लटकाये जाओगे। तुम उनका साथ छोड़ दो। मैं
तुम्हे बचा लूंगा।'¹ अशफाक अपनी जिम्मेदारी समझते थे। उन्हें अपने
मुसलमान होने और देश की सेवा करने का गर्व था। वे अपनी कौम पर
किसी भी प्रकार का धब्बा नहीं लगाना चाहते थे। अतः अशफाक को
लखनऊ में कैद कर रखा गया।
मिस्टर हार्टन दिल्ली से लखनऊ आये। अशफाक को डर था कि
सी०आई०डी० उनके फोटोग्राफ के द्वारा गवाहों को मेरी स्थिति के विषय में
बताकर न्यायालय के समक्ष अशफाक उल्ला बताया जा सकता है। पुलिस
ने मिस्टर हार्टन को अवगत कराया कि अशफाक के कक्ष से मिले सामान
और गवाहों से स्पष्ट हो चुका है कि यह व्यक्ति अशफाक उल्ला खान ही
है² और वह फोटोग्राफ 30 अक्टूबर 1926 तक दिल्ली में सील करके रखा
है। ......जब अशफाक को पहली बार मजिस्ट्रेट के सामने लाया गया, तो
कुछ समय बाद उन्होंने यह स्वीकार कर लिया कि वे अशफाक उल्ला
खान ही हैं।³
जांच के दौरान प्राप्त सामानों में एक पैम्पलेट प्राप्त हुआ, जो
'मैनीफेस्टो आफ कम्युनिष्ट पार्टी ऑफ इण्डिया' था, जिसे बंगाल
सरकार द्वारा तथा सेन्ट्रल प्राविंस द्वारा प्रतिबन्धित किया गया था। 6
पृष्ठों के मुद्रित पैम्पलेट, जिस पर 'हिन्दू-मुस्लिम समस्या' के विषय में
चर्चा की गयी थी, उस पर 15 मार्च, 1926 की तिथि अंकित थी। उसके
प्रथम पृष्ठ पर लिखा था कि वह जल्दी ही अशफाक को दिया गया है।

  1. पूर्वो-बनारसी दास चतुर्वेदी, पृष्ठ-167
  2. सी०आई०डी०, बायल्यूम-2, काकोरी षड़यंत्र केस-उ०प्र०रा०अभि०, पृष्ठ-41
  3. सी०आई०डी०, बायल्यूम-2, काकोरी षड़यंत्र केस-उ०प्र०रा०अभि०, पृष्ठ-41
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